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Meerut News: गैस संकट के साथ उद्योगों पर बिजली कटौती की दोहरी मार

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इजराइल-ईरान युद्ध की वजह से कामर्शियल सिलिंडर की भारी कमी के साथ बिजली कटौती की उद्योगों पर दोहरी मार पड़ रही है। लगातार बढ़ती कीमतें और प्रदूषण नियंत्रण विभाग की सख्ती भी कारखानों पर चोट पहुंचा रही है। स्थिति यह है कि जहां पहले कारखाने तीन शिफ्ट में चलते थे, वहीं अब अधिकांश इकाइयां सिमट कर एक शिफ्ट में आ गई हैं। इसका सीधा असर उत्पादन, निर्यात और रोजगार पर पड़ा है।
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परतापुर, ध्यानचंद नगर सहित औद्योगिक क्षेत्र के एसोसिएशनों के अनुसार खेल, पैकेजिंग और प्लास्टिक उद्योग को युद्ध आरंभ होने के बाद 400 करोड़ का घाटा हो चुका है। परतापुर इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के अध्यक्ष निपुण जैन बताते हैं कि कामर्शियल गैस सिलिंडर के दाम बढ़कर 2050 रुपये तक पहुंच गए हैं। जबकि जरूरत के अनुसार सिलिंडर उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। गैस की कमी के कारण कई कारखानों का संचालन प्रभावित हो रहा है। कर्मचारियों का ओवरटाइम पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। इससे श्रमिकों की आय पर सीधा असर पड़ा है।



तीन दिन में पांच घंटे तक विद्युत कटौती

-ध्यानचंद नगर इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल पुंडीर बताते हैं कि उद्योग पहले से ही प्रदूषण नियंत्रण विभाग की पाबंदियों से जूझ रहे थे। अब बिजली कटौती ने स्थिति और गंभीर बना दी है। पिछले तीन दिन से कार्य दिवस के समय ही तीन से पांच घंटे तक बिजली काटी जा रही है। इससे उत्पादन बाधित हो रहा है। उन्होंने बताया कि शिफ्ट कम होने के कारण कई श्रमिक बेरोजगार हो रहे हैं और उद्योगों में अस्थिरता बढ़ रही है।
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प्लास्टिक कारोबार पर गहराया संकट
प्लास्टिक उद्योग पर इसका सबसे अधिक प्रभाव देखने को मिल रहा है। प्लास्टिक व्यापारी शेखर भार्गव के मुताबिक निर्यात पूरी तरह ठप हो गया है। पहले से लिए गए टेंडर अब घाटे में पूरे किए जा रहे हैं। कच्चे माल की कीमत तीन गुना तक बढ़ चुकी है। उन्होंने बताया कि यदि टेंडर रद्द किए जाते हैं तो भारी पेनाल्टी का सामना करना पड़ेगा। इससे उद्योग और आर्थिक दबाव में आ जाएगा। प्लास्टिक रस्सी, बैग और अन्य उत्पाद बनाने वाले उद्यमी विशाल अग्रवाल के अनुसार महंगाई, गैस की अनुपलब्धता और लगातार रद्द हो रहे ऑर्डर उद्योग के लिए गंभीर संकट बन गए हैं। उन्होंने कहा कि बाजार में अनिश्चितता के कारण नए ऑर्डर भी नहीं मिल पा रहे हैं।



बीच के लोग कर रहे कालाबाजारी
फायर प्रूफ तार बनाने वाले उद्यमी राजीव सिंघल कहते हैं कि उद्योग चारों तरफ से दबाव में हैं। सरकार की ओर से कुछ प्रयास जरूर किए जा रहे हैं, लेकिन बिचौलिए सक्रिय हैं। जल्द गैस आपूर्ति सुचारु नहीं हुई तो औद्योगिक इकाइयां कई साल पीछे चली जाएंगी।
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