बसंती हवा, होली के अबीर ने माहौल में घुलकर फिजा को सतरंगी कर दिया। पौधों पर फूलों के गुच्छे लदे हैं। गमलों में रंगबिरंगे फूल खिल चुके हैं। घर में बने लॉन और बगीचों की खूबसूरती में लाल-पीले, नीले, गुलाबी रंग के फूलों ने चार चांद लगा दिए हैं। शहर में ऐसी कई बगीचा प्रेमी महिलाएं हैं, जिन्हें मौसम के इस पल का साल भर इंतजार रहता है। जब वो अपने बगीचे में बैठकर फूलों की महक और बहुरंगी सुंदरता का पूरा आनंद ले पाएं। कुछ महिलाएं तो इन दिनों बगीचे में सहेलियों को दावत भी देती हैं। लोग बगीचे में वक्त बिताकर सुकून महसूस कर रहे हैं।
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अपने बगीचे में चाय पीना सबसे सुखदायी
साकेत निवासी कल्पना जैन कहती हैं, कोई मुझसे पूछे कि आपकी दिनचर्या का सबसे खूबसूरत पल कौन सा है तो मेरा जवाब शाम की चाय का होगा। शाम को अपने बगीचे में बैठकर एक प्याली चाय पीने का इंतज़ार मुझे रात से शुरू हो जाता है। मैं खुद को एक सेलेब्रिटी समझती हूं। जब यह मौका छूटता है तो बहुत खालीपन लगता है। 21 सालों से कल्पना ने अपने घर में बगीचा संभाल रखा है। माली के अलावा खुद भी रोजाना 2 घंटे का वक्त बगीचे को देती हैं। इस वक्त में पौधों की देखभाल, गमलों को संवारना, घास देखने का काम होता है। बकौल कल्पना बगीचे की हरी घास, रंगबिरंगे फूल, बेलें और सब्जियां देखकर बहुत तसल्ली होती है। दुनिया के सारी परेशानियां दूर हो जाती हैं। मेरी सहेलियां भी घर आती हैं तो बगीचे में ही बैठना पसंद करती हैं।
20 साल पुराना घरेलू बगीचा
20 साल पुराना घरेलू बगीचा
यूनिवर्सिटी रोड निवासी मधु जैन का गार्डन 20 साल पुराना है। गार्डन में स्ट्राबेरी, चीकू, आडू, नारंगी, शहतूत है। अडेनियम, बोनसाई का भी अच्छा संग्रह है। मधु जैन कहती हैं, पौधों के बीच रहना मन को सुकून देता है, आंखों के सामने हरियाली अच्छी लगती है। टाइम पास भी हो जाता है। घर में बगीचे लगाने से ढेरों फायदे हैं, घर की उगी सब्जी, फल मिल जाते हैं। मुझे अक्सर बाहर से सब्जी नहीं खरीदनी पड़ती। बगीचे में कई प्रकार की सैलरी, वेजिस और औषधीय पौधे भी लगाए हैं। बगीचे को किचन गार्डन एसोसिएशन की ओर से बेस्ट गार्डन का अवार्ड भी मिल चुका है।
टाइमपास बगीचा अब बना शौक
प्रभात नगर निवासी वीना रस्तोगी कहती हैं, घर में रहकर क्वालिटी टाइमपास करने के लिए पौधों का ख्याल रखना सबसे बेहतरीन विकल्प है। मैंने इसी उद्देश्य से अपने घर में लॉन बनाया। लॉन को बगीचे का आकार दिया। 10 गमलों से 200 गमले तक आ गई। फल, फूल, सब्जी, औषधीय पौधे, सजावटी पौधे, बोनसाई, अडेनियम सभी लगाए। अब यह बगीचा मेरा शौक बन गया है। एक दिन अपने बगीचे में दो घंटे मेहनत न कर लूं, तो खालीपन लगता है। ये वक्त सबसे अच्छा वक्त होता है। जो मुझे सुकून और सकारात्मकता देता है। इसी बहाने घर की हरी सब्जी तैयार हो जाती है। बच्चों को भी इंतजार रहता है कि गमले में उगी पत्ता गोभी, पालक टूटे और उसकी सब्जी खाने मिले।
घर में बगीचे के ढेरों लाभ
बगीचे में चाय पीना सबसे सुखदायी
अच्छा टाइम पास हो जाता है।
घर में सूरज की तरफ से आने वाली सीधी धूप से राहत मिलती है, हीट कम होती है।
सुबह सुबह टहलने, योग के लिए बाहर नहीं जाना पड़ता।
शाम को लॉन में बैठकर चाय पीने का आनंद मिलता है।
आंखों के सामने हरियाली और फूलों के प्राकृतिक सौंदर्य से सुकून मिलता है।
घर की उगी केमिकल रहित सब्जी व फल खाने को मिलते हैं।
घर में दिनभर ताजा हवा मिलती है। इससे माहौल स्वस्थ रहता है। सकारात्मक ऊर्जा का अहसास होता है।
बगीचे में डालने के लिए केमिकल या रासायनिक खादों के प्रयोग के बजाय, घर में ही पौष्टिक खाद तैयार कर सकते हैं। रसोई से नियमित निकलने वाले सब्जी, फलों के छिलके, ग्रीन टी बैग, चाय की पत्ती, गोबर, पत्तियों, पुराने फूलों से आसानी से अच्छी खाद बन सकती है। इन चीजों को अलग-अलग गड्ढों में एकत्र करके खाद तैयार करें। तैयार खाद का प्रयोग घर के बगीचे में करें। इसके अलावा एक्सपायरी दवाओं, एक्सपायरी प्रोटीन पाउडर, अंडे के छिलके, अखरोट व बादाम के छिलक ों का प्रयोग भी खाद के रूप में करें। चने की दाल का पाउडर, पुराना बेसन भी अच्छा खाद विकल्प है।