मेरठ। शहर में डोर टू डोर कूड़ा उठाने वाली बीवीजी कंपनी का अनुबंध नगर आयुक्त सौरभ गंगवार ने निलंबित कर दिया। सात दिन में नोटिस का जवाब न देने पर अनुबंध निरस्त करने की चेतावनी दी है। आरोप है कि कंपनी ने अनुबंध के विरुद्ध शहर में कूड़ा कलेक्शन का कार्य किया। नगर निगम को काफी हानि भी पहुंचाई है। नियम अनुसार 1.50 करोड़ की निष्पादन बैंक गारंटी निष्पादित करने की शर्त पूरी नहीं है। इसकी मॉनीटरिंग करने के लिए नगर आयुक्त ने पांच अधिकारियों की कमेटी गठित कर दी है।
नगर आयुक्त ने बताया कि निगम और बीवीजी कंपनी का अनुबंध था। समझौते के निष्पादन की तारीख से पांच साल की अवधि के लिए आरएफपी दस्तावेज के तहत प्रदान किए गए अपने अनिवार्य दायित्वों को पूरा करना आवश्यक था। यह समझौता 6 जनवरी 2022 को निष्पादित किया गया था।
अनुबंध का पालन न करने और बार-बार हड़ताल पर चले जाने से परेशान होकर नगर निगम ने खुद ही महानगर से डोर टू डोर कूड़ा उठाने का कार्य 15 दिन पहले शुरू कर दिया। हड़ताल पर जाने के बाद निगम ने 7 दिन का नोटिस कंपनी को दियाए जिसका जवाब तक नहीं दिया गया। इन बिंदु को ध्यान में रखते हुए नगर आयुक्त ने कंपनी का अनुबंध निलंबित करना बताया गया।
आखिर क्यों नहीं की कंपनी की मॉनिटरिंग
बीवीजी कंपनी के लापरवाही और सरकारी हानि पहुंचाने में नगर निगम अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। कंपनी के कार्य की मॉनिटरिंग नहीं की गई और बिना जांच पड़ताल ही लगातार भुगतान होता रहा। हाल के 3 महीने में भी करीब 5 करोड रुपये का भुगतान नगर निगम ने कंपनी को किया है। सवाल उठता है कि जब कंपनी काम ही नहीं कर रही थी तो निगम के अधिकारियों की उन पर मेहरबानी क्यों की।
कमेटी में जिम्मेदार अधिकारी क्यों नहीं
नगर आयुष द्वारा गठित कमेटी में अपर नगर आयुक्त पंकज कुमार, वित्त एवं मुख्य अधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह, मुख्य नगर लेखा परीक्षक अमित भार्गव, अधिशासी अभियंता निर्माण अमित शर्मा और डिपो प्रभारी जोनल सेक्रेटरी राजेश यादव को रखा गया है। जबकि महानगर से कूड़ा उठाने की मुख्य जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग प्रभारी अपर नगर आयुक्त प्रमोद कुमार और प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. हरपाल सिंह की है। इनको कमेटी से दूर रखा गया है। जिम्मेदार अधिकारी ही कंपनी के कारनामों की पोल खोल सकते हैं। उन्हें ही कंपनी की ज्यादा जानकारी है।