सुबह 10:18 से दोपहर 1:17 बजे तक रहेगा वृश्चिक स्थिर लग्न, शहर में 74 स्थानों पर होंगे बड़े आयोजन
25 को होगा विसर्जन
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। गणेश चतुर्थी का स्थापना पर्व इस बार 14 सितंबर को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। ज्योतिष आचार्य विनोद त्यागी ने बताया इसी दिन घरों और पंडालों में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। गणपति विसर्जन 25 सितंबर, शुक्रवार को किया जाएगा। शहर में 74 स्थानों पर बड़े आयोजन होंगे। आयोजक भी तैयारी में जुटे हैं।
इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रोलॉजिकल साइंस के सचिव आचार्य कौशल वत्स ने बताया कि गणेश चतुर्थी को विनायक चतुर्थी भी कहा जाता है। मान्यता है कि भगवान गणेश बुद्धि, विवेक, धन-धान्य और रिद्धि-सिद्धि के कारक हैं। उनकी आराधना से घर में सुख, समृद्धि और शांति आती है तथा बाधाएं दूर होती हैं।
पंचांग के अनुसार गणपति स्थापना के लिए प्रातः 9:05 से 10:13 बजे तक शुभ चौघड़िया रहेगा। इसके बाद प्रातः 10:18 से दोपहर 1:17 बजे तक वृश्चिक स्थिर लग्न रहेगा। प्रातः 7:30 से 9:00 बजे तक राहुकाल रहेगा, जिसमें गणपति स्थापना नहीं करनी चाहिए। भगवान गणेश का जन्म मध्याह्न काल में माना गया है, इसलिए मध्याह्न का समय गणेश पूजन के लिए विशेष शुभ माना जाता है। सोमवार को चंद्रदर्शन वर्जित रहेगा।
मिट्टी की प्रतिमा को दें प्राथमिकता
- आचार्य मनीष स्वामी ने बताया कि गणपति की प्रतिमा खरीदते समय पर्यावरण का भी ध्यान रखने की सलाह दी गई है। मिट्टी से बनी प्रतिमा को प्राथमिकता दें, ताकि विसर्जन के बाद जल प्रदूषण न हो। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पीले और लाल रंग की गणेश प्रतिमा शुभ मानी जाती है। चार भुजाओं वाले लाल गणपति की उपासना से संकट दूर होने की मान्यता है। घर के लिए बैठे हुए गणपति की प्रतिमा शुभ मानी जाती है। ऐसी प्रतिमा लेने की परंपरा है, जिसकी सूंड बाईं ओर मुड़ी हुई हो।
- दूर्वा और मोदक हैं भगवान को प्रिय
भगवान गणेश को दूर्वा अत्यंत प्रिय मानी जाती है। पूजा में दूर्वा अर्पित करने के साथ मोदक का भोग लगाने की परंपरा है। घर में बनाए गए मोदक का भोग लगाना विशेष शुभ माना जाता है। इसके अलावा मोतीचूर या बेसन के लड्डू भी अर्पित किए जा सकते हैं।
स्नान-ध्यान कर व्रत का संकल्प लें
- आचार्य कौशल ने बताया कि गणेश चतुर्थी के दिन स्नान-ध्यान कर व्रत का संकल्प लें। दोपहर के समय लाल कपड़े पर गणपति की प्रतिमा स्थापित करें और गंगाजल छिड़ककर भगवान का आह्वान करें। इसके बाद जल और पंचामृत से स्नान कराकर वस्त्र अर्पित करें। गणपति को जल, अक्षत, दूर्वा, लड्डू, पान और धूप अर्पित करें। इसके बाद ‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र का जाप करें, घी का दीपक जलाकर आरती करें और मोदक का प्रसाद चढ़ाएं। धार्मिक मान्यता के अनुसार स्थापना के बाद पूजा के दिनों में अखंड घी का दीपक जलाने की परंपरा है।