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Meerut News: गाजियाबाद के नाम है सबसे अधिक मतों के अंतर से सांसद बनाने का रिकार्ड

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गाजियाबाद के नाम है सबसे अधिक मतों के अंतर से सांसद बनाने का रिकार्ड
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-पश्चिमी यूपी में 2014 में 8 और 2019 में तीन सीटों पर बीजेपी ने दर्ज की थी दो लाख से अधिक के अंतर से जीत
सैयद यासिर रज़ा
मेरठ। भारतीय जनता पार्टी ने 2014 में जब पहली बार पूर्ण बहुमत के साथ देश में सरकार बनाई तो यूपी में कई रिकार्ड बने थे। भाजपा ने यूपी की 80 में से 71 सीटों पर जीत हासिल की थी, दो सीटों पर उसके सहयोगी दल के प्रत्याशी जीते थे। यानी 90 प्रतिशत से अधिक सीटें भाजपा ने जीतीं थीं। इसमें पश्चिमी यूपी की 8 सीट ऐसी थी जहां भाजपा ने दो लाख से भी अधिक के अंतर से अपने विरोधी को हराया था। 2019 में सपा और बसपा ने गठबंधन कर चुनाव लड़ा, जिसके बाद कई सीटों का न सिर्फ मार्जिन कम हो गया बल्कि एक सीट ऐसी भी रही जो 2014 में भाजपा 2 लाख के बड़े अंतर से जीती थी और 2019 में 70 हजार वोट से हार गई थी।
2014 के चुनाव में भाजपाा ने गाजियाबाद, बुलदंशहर, मुजफ्फरनगर, गौतमबुद्ध नगर, कैराना, मेरठ, बागपत और बिजनौर सीट 2 लाख से भी अधिक के अंतर से जीती थी] लेकिन 2019 में केवल गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर और बुलंदशहर में जीत का अंतर 2 लाख से अधिक का रहा। बाकी सीटों पर जीत का अंतर कम हो गया। बिजनौर की सीट 2014 में भाजपा के कुंवर भारतेंद्र ने 2 लाख 5 हजार 774 वोटों से जीती थी। लेकिन 2019 में बसपा के मलूक नागर ने भाजपा को 69941 वोटों से हरा कर जीत हासिल की थी। अमरोहा में कंवर सिंह तंवर 1 लाख 58 हजार वोटों के अंतर से जीते थे। लेकिन 2019 के चुनाव में वह बसपा के दानिश अली से 63248 वोटों से हार गए। मुजफ्फरनगर में संजीव बालियान ने 2014 में चार लाख एक हजार मतों से कादिर राणा को हराया था, जबकि 2019 में बालियान ने चौधरी अजित सिंह को महज 6526 मतों से पराजित किया।
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गाजियाबाद: जनरल वीके सिंह के नाम है सबसे बड़े अंतर से जीत का रिकार्ड
अंतर के हिसाब से सबसे बड़ी जीत की बात करें तो यह रिकार्ड गाजियाबाद से चुनाव लड़ चुके जनरल वीके सिंह के नाम है। जनरल वीके सिंह ने 2014 में कांग्रेस के राजबब्बर को 5 लाख 67 हजार 260 वोटों के अंतर से हराया था। पूरे यूपी में अंतर के हिसाब से सबसे बड़ी जीत का यह रिकार्ड है। हालांकि 2019 में यह अंतर मामूली कम हुआ और 5 लाख 1 हजार 500 के अंतर से जनरल वीके सिंह ने इस बार फिर जीत दर्ज की। 2024 में भाजपा ने उनका टिकट काट दिया। इस बार भाजपा ने अतुल गर्ग को अपना प्रत्यााशी बनाया है। कांग्रेस-सपा गठबंधन ने डॉली शर्मा और बसपा ने नंद किशोर पुंडीर को उतारा है। देखना दिलचस्प होगा कि गाजियाबाद की जनता जिसने बीते दो चुनाव में पूरे प्रदेश में सबसे बड़े अंतर से अपना सांसद चुना था, इस बार जीत का अंतर कितना रखती है।
मेरठ: हारते-हारते बचे थे 2014 में 2 लाख 32 हजार से जीतने वाले राजेंद्र अग्रवाल
मेरठ में 2014 में राजेंद्र अग्रवाल ने एकतरफा जीत हासिल की थी और 232 हजार के बड़े अंतर से अपने विरोधी को हराया था। लेकिन 2019 में सपा और बसपा के साथ आने से मुकाबला कांटे का हो गया। कैंट में मिली बड़ी बढ़त की वजह से वह 4729 वोटों से जीत सके थे। इस बार भाजपा ने उनका टिकट काट कर छोटे पर्दे के धारावाहिक में राम का किरदार निभाने वाले अरुण गोविल को टिकट दिया है। उनके सामने सपा-कांग्रेस गठबंधन की सुनीता वर्मा हैं। सपा ने यहां जनरल सीट पर दलित उम्मीदवार को उतार कर नया प्रयोग किया है। यह सीट सपा अब तक नहीं जीत सकी है।
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भाजपा ने 2014 में 2 लाख के कम अंतर से जीती सीट 2019 में गंवाई
भाजपा ने 2014 में पश्चिमी यूपी की अमरोहा, नगीना, मुरादाबाद, सहारनपुर, रामपुर और संभल सीट दो लाख के कम अंतर से जीती थी। अमरोहा में कंवर सिंह तंवर 158214 वोटों से, नगीना में यशवंत सिंह 92390 वोटों से, मुरादाबाद में कुंवर सर्वेश कुमार 87504 वोटों से, सहारनपुर में राघव लखनपाल 65090 वोटों से, रामपुर में नेपाल सिंह 23435 वोटों से और संभल में सत्यपाल सिंह 5174 वोटों से जीती थी। लेकिन 2019 में यह सभी सीटें भाजपा हार गई। अमरोहा में बसपा के दानिश अली 63248 वोटों से जीते, नगीना में बसपा के गिरीश चंद्र 166832 वोटों से जीते, मुरादाबाद से सपा के एसटी हसन 97878 वोटों से जीते, सहारनपुर में बसपा के हाजी फजलुर्रहमान 22417 वोटों से, रामपुर में सपा के आजम खान 109997 वोटों से और संभल में सपा के शफीकुर्रहमान बर्क 174826 वोटों से जीतने में कामयाब रहे थे।
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