महाराष्ट्र पुलिस ने बैंकों में की पूछताछ तो फर्जी मिले आरोपियों के पते
पीड़ित ने विज्ञापन के आधार पर किया था फाइनेंस कंपनी से संपर्क
मेरठ।
लोन दिलाने के नाम पर महाराष्ट्र के कोल्हापुर निवासी रिटायर्ड बैंक अधिकारी से 22 लाख रुपये ठगी का मामला प्रकाश में आया है। ठगी करने वाले आरोपी मेरठ के बताए गए हैं। बुधवार को कोल्हापुर से आई पुलिस टीम ने मामले को लेकर बैंक में पूछताछ की तो आरोपियों के पते फर्जी मिले। क्षेत्रीय थाने में जानकारी देने के बाद पुलिस लौट गई।
कोल्हापुर थाने के एसआई अभिजीत भोंसले के अनुसार, कोल्हापुर निवासी गजानन भोंसले बैंक से रिटायर्ड हैं। जुलाई, 2018 में उन्होंने रियल स्टेट में इन्वेस्ट करने के लिए लोन लेने की योजना बनाई। एक विज्ञापन के आधार पर उन्होंने सौभाग्य फाइनेंस कंपनी में संपर्क साधा। नीरज नाम के व्यक्ति ने बेहद कम समय में उन्हें 8 करोड़ रुपया लोन दिलाने का दावा किया। इस दौरान गजानन ने नीरज द्वारा मांगे गए सभी कागजात भी उपलब्ध करा दिए। यही नहीं प्रक्रिया को तेजी से पूरा कराने के एवज में थोड़े-थोड़े कर उनसे 22 लाख रुपये भी एकाउंट में ट्रांसफर करा लिए। अधिक समय बीतने पर भी जब उन्हें लोन नहीं मिला तो उन्होंने नीरज से मिलने को कहा। उसके बाद से नीरज का फोन बंद हो गया। ठगी का आभास होने पर गजानन रिपोर्ट दर्ज कराई।
बैंक में दर्ज कराए पते फर्जी
काफी समय से कोल्हापुर पुलिस मामले में छानबीन कर रही है। जांच में पता चला कि उक्त फाइनेंस कंपनी उत्तर भारत की है। पुलिस को पता चला कि जिन एकाउंट नंबरों में पैसे ट्रांसफर किये गये थे, वह एकाउंट नंबर मेरठ जनपद स्थित बैंकों के हैं। बुधवार को कोल्हापुर पुलिस ने मेडिकल पुलिस से संपर्क साधा। उसके बाद बैंकों से एकाउंट की डिटेल निकलवाई। उन्होंने बैंक में दर्ज पते पर संपर्क किया, लेकिन वहां इस नाम का कोई व्यक्ति नहीं मिला।
आधार लिंक के नाम पर खानापूर्ति
एसआई अभिजीत भोंसले ने बताया कि उन्होंने दो बैंकों में संपर्क कर एकाउंट की पूरी डिटेल ली। चार खातों में से तीन खातों में आधार कार्ड लिंक ही नहीं थे। एक एकाउंट में आधार लिंक मिला तो उसकी डिटेल्स स्पष्ट नहीं थी। अफसरों से संपर्क किया तो उन्होंने इस संबंध में अधिक जानकारी होने से इंकार कर दिया।