पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक
- फोटो : अमर उजाला
बागपत जिले (उस समय मेरठ जिला) के हिसावदा गांव में 1946 में जन्में सत्यपाल मलिक का राजनीतिक नर्सरी मेरठ कॉलेज। उनके करीबी मित्र रहे पूर्व एमएलसी जगत सिंह बताते हैं कि मेरठ कॉलेज में सीधे छात्रों की वोट द्वारा छात्र संघ चुनाव नहीं होते थे, अप्रत्यक्ष रूप से प्रीमियर चुने जाते थे।
सत्यपाल मलिक 1965-66 में पहले प्रीमियर चुने गए। इसके बाद छात्र संघ चुनाव बंद कर दिए गए तो छात्रों ने उग्र आंदोलन कर दिया। लखनऊ में सत्यपाल मलिक के साथ सैकड़ों छात्रों ने विधानसभा का घेराव किया और अपनी गिरफ्तारी दी।
इसके बाद छात्र संघ चुनाव बहाल हुए तो पहली बार सीधे छात्रों की वोटों से चुनाव हुए और 1969 में सत्यपाल मलिक सीधे छात्रों द्वारा चुने जाने वाले पहले छात्र संघ अध्यक्ष बने। मेरठ कॉलेज से उनहोंने बीएससी व एलएलबी की।
यह भी पढ़ें: Former Governor Death: गांव हिसावदा की हवेली में पसरा सन्नाटा, सत्यपाल मलिक की यादों में डूबा बागपत
पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक
- फोटो : अमर उजाला
पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक
- फोटो : अमर उजाला
चौधरी चरण सिंह बताते थे अपना वारिस
सत्यपाल मलिक को अपने दल में शामिल करने के बाद चौधरी चरण सिंह उनसे बहुत प्रभावित हुए। चौधरी चरण सिंह ने उन्हें अपना वारिस बताया। लंबे समय तक सत्यपाल मलिक चौधरी चरण सिंह की आंख का तारा बने रहे। इसके बाद दोनों में बात बिगड़ गई और सत्यपाल मलिक पार्टी से बाहर कर दिए गए।
राज्यपाल बनने पर मेरठ कॉलेज आए थे मलिक
राज्यपाल बनने के बाद सत्यपाल मलिक मेरठ कॉलेज की 125वीं वर्षगांठ पर 2017 में आए थे और उन्होंने मेरठ कॉलेज में इतिहास विभाग एवं संग्रहालय के भवन का उद्घाटन किया था। उस समय उन्होंने मेरठ कॉलेज को अपनी राजनीतिक नर्सरी बताया था और अपने पुराने दिनों को याद किया था।