मेरठ में ब्रह्मपुरी के साईंपुरम स्थित मकान से बरामद दवाओं और इंजेक्शन के भंडारण से लेकर इसके आपूर्ति से जुड़े नेटवर्क की जांच जारी है। अभी तक की जांच में अलीगढ़ से ही दवाओं की खेप यहां पैकिंग के लिए आने की बात बताई जा रही है। वहीं, खेल से लेकर पुलिस और सेना भर्ती के मैदानों तक शक्तिवर्धक, दर्द निवारक दवाओं की आपूर्ति की संभावना को देखते हुए सप्लायरों के कनेक्शन खंगाले जा रहे हैं।
दरअसल, अलीगढ़, कानपुर, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर सहित अन्य जिलों में पहले भी ऐसे मामले सामने आते रहे हैं कि खेलों और भर्ती प्रक्रिया के दौरान प्रतिबंधित दवाओं का प्रयोग किया गया। पुलिस, सेना और खेलों से जुड़ा होने के कारण प्रतिबंधित और नकली दवाओं के सप्लायरों के लिए मेरठ जिला भी करोड़ों की कमाई का हब रहा है। इसलिए अलीगढ़ के साथ ही जिले से जुड़े कनेक्शन भी तलाशे जा रहे हैं।
कुछ साल पहले शहर के खेल मैदानों पर प्रतियोगिता के दौरान काफी इंजेक्शन और दवाएं मिली थीं। इनमें नैनड्रोन साल्ट की पुष्टि हुई थी। यह इंजेक्शन बेहद कम समय में नसों को ताकत देने का काम करता है और स्टेमिना बढ़ाता है।
इसके अलावा डेक्सा मेथसोन सोडियम फास्फेट के इन्जेक्शन भी बरामद हुए।
अब माधवपुरम में अल्ट्रासेट और ट्रमोडोल हाइड्रोक्लोराइड के सॉल्ट वाली दवाओं के रेपर मिले हैं। बॉक्सिंग कोच भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि ऐसी दवाओं के सेवन से बचना चाहिए। वहीं ड्रग इंस्पेक्टर पवन शाक्य ने बताया कि साईंपुरम से मिली दवाओं में कुछ शक्तिवर्धक और दर्द निवारक हैं। इसलिए इनके दुरुपयोग की संभावनाओं को देखते हुए निगरानी और जांच की जा रही है।