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Meerut News: दोस्त गिलहरी...चेतन के कंधे पर लड्डू-बर्फी

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मखदूमपुर गंगा घाट पहुंचे चेतन के कंधे पर बैठी दोनों गिलहरी स्रोत संवाद
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जहां जाते हैं अपने साथ लेकर जाते हैं गिलहरी
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रविंद्र चौहान
हस्तिनापुर। कहते हैं प्रेम सीमाएं नहीं देखता। वह कहीं पर किसी से भी हो सकता है। ऐसा ही एक प्यार भरा दृश्य मखदूमपुर मेले में देखने को मिला जहां एक इंसान और गिलहरी के बीच प्यार का टूट रिश्ता नजर आया।
वैसे तो इंसान और जानवरों के बीच प्यार भरे रिश्ते काफी देखने को मिलते हैं लेकिन इंसानों से दूरी बनाकर रखने वाली गिलहरी और एक व्यक्ति के बीच प्यार भरा रिश्ता उस समय चर्चा का विषय बन गया जब वह उन्हें गंगा स्नान के लिए गंगा घाट पर लेकर आया। मवाना निवासी चेतन सिंह सैनी ने बताया कि करीब छह माह पूर्व उन्होंने जब अपने घर में बने भूसे के कमरे को तोड़ा तो वहां एक गिलहरी अपने दो छोटे बच्चों को लेकर रहती थी। डर के मारे वह भाग गई। इसके बाद वापस नहीं आई।
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उन्होंने उसकी मां के बिना इन बच्चों का पालन पोषण किया। इसके बाद वह उनके परिवार के साथ घुल-मिल गए। आज उनका रिश्ता उनसे ऐसा जुड़ा हुआ है कि यह जैसे उनके परिवार के कोई सदस्य हैं। अब वह दोनों बच्चे छह माह के हो चुके हैं और उनके कंधे पर रहते हैं और चेतन को वह अपने परिवार सा महसूस करते हैं। दोनों गिलहरियों का नाम उन्होंने लड्डू और बर्फी रखा है क्योंकि दोनों गिलहरियों को अलग-अलग मिठाई पसंद है।
मंगलवार को चेतन सिंह सैनी मखदूमपुर मेले में अपने कंधे पर दो नन्हीं गिलहरियों को लेकर पहुंचे। जो उनसे एक पल के लिए भी अलग नहीं होतीं। दिन हो या रात, घर हो या बाहर, हर समय उनके कंधे, बांह या गर्दन पर ही लिपटी रहती हैं। इंसान और जानवरों के बीच प्यार भरा यह रिश्ता देखकर मेला स्थल पर मौजूद लोग आश्चर्यचकित रह गए। (संवाद)


परिजन गिलहरी के साथ खाते हैं खाना
चेतन बताते हैं कि जब घर में खाना बनता है तो पहले इन्हीं नन्ही गिलहरियों को खिलाया जाता है और उन्हें दूध पिलाया जाता है। इसके बाद वह अपने पिंजरे में चली जाती हैं। इसके बाद उनका परिवार खाना खाता है।
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परेशान होने पर आती है चेतन के पास
चेतन बताते हैं कि जब उनकी इन गिलहरियों को कोई परेशानी हो या उन्हें कुछ अजीब सी गतिविधि नजर आती है तो वह तुरंत दौड़कर उसके पास आती हैं और उससे इशारों-इशारों में बात करती हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें अंदाजा नहीं था कि यह गिलहरी उनके जीवन का एक हिस्सा बन जाएंगी। आज वह भी उनसे बेहद प्यार करते हैं।

मखदूमपुर गंगा घाट पहुंचे चेतन के कंधे पर बैठी दोनों गिलहरी स्रोत संवाद

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