जमीयत उलमा-ए-हिंद (दिल्ली) के प्रेस प्रवक्ता मौलाना अजीमुल्लाह सिद्दीकी कासमी ने बताया कि कथित तौर से दिल्ली और अमरोहा से आतंकी मॉड्यूल मुकदमे में गिरफ्तार किए गए चार अभियुक्तों को मंगलवार को पटियाला हाउस कोर्ट से जमानत मिल गई। छह माह गुजरने के बाद भी चार्जशीट दाखिल न किए जाने के दृष्टिगत जमीयत के वकीलों ने जमानत अर्जी दाखिल की थी।
बुधवार को जारी बयान में मौलाना अजीमुल्लाह कासमी ने बताया कि एनआईएन ने दिल्ली और अमरोहा से आतंकी मॉड्यूल मुकदमे में 14 लोगों को गिरफ्तार किया था। जिसमें दस लोगों के खिलाफ पिछले महीने 21 जून को एनआईए ने चार्जशीट दाखिल की थी, लेकिन वह चार लोगों मो. इरशाद, रईस, जुबैर मलिक और मो. आजम के खिलाफ छह माह गुजर जाने के उपरांत भी चार्जशीट दाखिल करने में असफल रही। जिसको आधार बनाकर जमीयत के वकील नुरुल्लाह ने जमानत के लिए प्रार्थना पत्र दाखिल किया था। प्रार्थना पत्र की सुनवाई करते हुए एडिशनल जज राकेश सियाल ने वर्णन किए गए आरोपियों को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।
सिद्दीकी ने बताया कि रिहाई के आदेश के बाद अभियुक्तों के परिवार वाले जमीयत के केंद्रीय कार्यालय पहुंचे। जहां उन्होंने जमीयत के सचिव मौलाना हकीमुद्दीन कासमी व मौलाना नियाज अहमद फारुकी एड. से मिलकर जमीयत और राष्ट्रीय महासचिव मौलाना महमूद मदनी का आभार व्यक्त किया।
मौलाना अजीमुल्लाह ने यह भी कहा कि दहशतगर्दी के इल्जाम में गिरफ्तार किए गए निर्दोष लोगों की रिहाई के लिए मौलाना महमूद मदनी संकल्पबद्ध है। जिसके चलते वह पूरी मजबूती के साथ इन मामलों की पैरवी कर रहे हैं।
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