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पूर्व सचिव ने किया था करोड़ों का खेल, अब प्रभात कुमार ने बैठा दी जांच, होंगे कई अहम खुलासे

Thu, 11 Jan 2018 12:25 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, अमित मुदगल, मेरठ
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कमिश्नर डॉ. प्रभात कुमार
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डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के लिए हुए भू अधिग्रहण में भारी गड़बड़झाला सामने आ रहा है। अधिसूचना जारी होने की तारीख के दिन से लेकर तत्काल पहले और बाद में बैनामे किए गए हैं। बाद में इसका भारी भरकम मुआवजा लिया गया। साथ ही दिल्ली एक्सप्रेस वे में भी इसी तरह का नया खेल सामने आया है। आयुक्त के यहां हुई शिकायत के आधार पर जांच शुरू की गई है, जिसमें यह भी सामने आ रहा है कि भारत सरकार में तैनात रहे एक पूर्व सचिव ने अपने रिश्तेदारों को जमीनों की खरीद कराकर करोड़ों के वारे-न्यारे किए हैं। इस संबंध में एडवोकेट अब्दुल वहाब और भागमल सिंह ने आयुक्त डॉ. प्रभात कुमार को शिकायत की थी। अपर आयुक्त राधेश्याम मिश्रा ने इसकी जांच शुरू की है। पहले यह जांच एडीएम कार्यालय को ही भेज दी गई थी। लेकिन इसी विभाग के कर्मचारियों पर आरोप लगे हैं तो अब अपर आयुक्त जांच कर रहे हैं। इस बाबत सभी बैनामे भी मंगाए गए हैं।

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मेरठ से होकर गुजरने वाले डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के लिए 25 मार्च 2015 को प्रथम अधिसूचना जारी कर दी गई थी। केंद्रीय रेल अधिनियम 1989 के तहत अधिसूचना जारी होने के साथ ही जिन जमीनों का अधिग्रहण होना था उन खसरा नंबरों को भी आरक्षित घोषित कर दिया गया। अधिसूचना की तैयारियां चूंकि पहले ही थीं तो इस सूचना के आधार पर खेल शुरू हो गया। अधिग्रहण की जद में आए गांव इदरीशपुर में 23 अप्रैल 2015 को अर्जन के दायरे में आए खसरा नंबर 245 के बैनामे किए गए। गांव छज्जूपुर में 25 मई 2015 को खसरा नंबर 400 में से बैनामे हुए। अधिसूचना 25 मार्च को जारी हुई और 26 मार्च को ही गांव जंगेठी में भी खसरा नंबर 500 में से किसानों से जमीन खरीद ली गई। हैरत की बात यह रही कि अधिसूचना जारी होने से एक दिन पूर्व इन्हीं खरीददारों ने 24 मार्च को जंगेठी गांव से भी खसरा नंबर 496 में से जमीन खरीदी। सभी खरीददारों में एक ही परिवार के सदस्यों के नाम पर खरीद फरोख्त हुई। महिलाओं के नाम भी जमीन खरीदी गई।

दिल्ली एक्सप्रेस वे में भी नया खेल
इसी तरह दिल्ली मेरठ एक्सप्रेस वे तथा इसी में एनएच-58 को जोड़ने वाले लिंक एक्सप्रेस के लिए हुए भू अधिग्रहण में भी बड़ा खेल सामने आ रहा है। इसमें भारत सरकार में बतौर सचिव तैनात रहे एक अधिकारी ने उसी समय से जमीनों की खरीद फरोख्त अपने रिश्तेदारों के नाम शुरू कर दी जब इसकी अधिसूचना के लिए कैबिनेट में प्रक्रिया चल रही थी। उन्हें पहले से ही पता चल गया था कि यहां जमीनों का अधिग्रहण होगा। इस पूरे रैकेट ने बेनामी कंपनियां खड़ी कीं और उनके नाम पर जमीन खरीदकर भारी मुआवजा उठाया गया। चंदसारा, सलेमपुर और नंगलापातू गांव में दस से 12 गुना तक मुआवजा तय कराया। किसानों से जमीन 400 रुपये प्रति वर्ग मीटर खरीदी गई और बाद में 5280 रुपये प्रति वर्ग मीटर तक का मुआवजा लिया गया। केवल इन्हीं कंपनियों ने लगभग 85 करोड़ रुपये का मुआवजा प्राप्त किया।
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चार गुना लिया मुआवजा

नए खुलासे
इन बैनामों में किसानों को घोषित किए गए मुआवजे में कुछ रकम बढ़ाकर जमीन खरीदी गई जबकि बाद में चार गुना तक रकम इस तरह की जमीनों में बतौर मुआवजा लिया गया। कई जगह तो दस गुना तक मुआवजा लिया गया।

पुश्तैनी नहीं थे कृषक
शिकायत में यह बात सामने आ रही है कि ये सब लोग पुश्तैनी कृषक नहीं थे जबकि भूमि अर्जन, पुनर्वास और पुनर्व्यस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम 2013 में यह व्यवस्था पुश्तैनी किसानों के लिए है। शहरी क्षेत्र में दोगुना और ग्रामीण क्षेत्र में चार गुना मुआवजा देने का प्रावधान इन्हीं के लिए बनाया गया है। खरीददारों के लिए नहीं।

अधिकारियों ने खरीदीं दुकानें
इस रकम से मेरठ में तैनात रहे एक एडीएम एलए और उनके मातहत कर्मचारियों ने भी संपत्तियां खरीदीं और इसे अपनी घोषित आय में भी छुपाया। यहां तक कि अधिकारियों और कर्मचारियों ने एक ही जगह प्रॉपर्टी खरीदी। एक ही कांप्लेक्स में दुकानें खरीद लीं।

आयुक्त मेरठ डॉ. प्रभात कुमार ने बताया कि फ्रेट कॉरिडोर और दिल्ली एक्सप्रेस वे के मुआवजे में गड़बड़झाला सामने आ रहा है। तत्कालीन एडीएम एलए, उनके मातहत कर्मचारियों, सरकार के एक पूर्व सचिव तथा कुछ लोगों का एक पूरा गिरोह काम कर रहा है। अपर आयुक्त से कहा है कि 15 फरवरी तक इसकी जांच पूरी कर रिपोर्ट दें।

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