इसके बाद अप्रैल 2019 में मामला सीबीआई ने अपने थाने में दर्ज किया था। चीनी मिलें खरीदने में इस्तेमाल की गई मुखौटा कंपनियों के निदेशक सौरभ मुकुंद के मकान और मिर्जापुर में मोहम्मद इकबाल तथा नसीम के मकान पर सीबीआई ने मंगलवार को छापा मारा था। अब अनुमान लगाया जा रहा है कि चीनी मिलें खरीदने के मामले में नामजद सातों आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास तेज होंगे। इनमें मोहम्मद इकबाल के दोनों बेटे जावेद और वाजिद भी आरोपी हैं।
सियासी रसूख भी बढ़ाता रहा
मोहम्मद इकबाल ने पैसा कमाने के साथ ही राजनीतिक पावर बढ़ाने का भी खूब प्रयास किया। खुद बसपा के टिकट पर एमएलसी का चुनाव जीता और फिर अपने भाई महमूद अली को भी बसपा के टिकट पर ही एमएलसी का चुनाव लड़ाया। वर्तमान में महमूद अली बसपा एमएलसी हैं। एक दौर यह था कि प्रदेश सरकार में मोहम्मद इकबाल की मजबूत पकड़ बताई जाती थी, जिसके चलते बसपा के आला नेताओं का करीबी बन गया। उधर, 2017 में जब प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हुआ, तो मोहम्मद इकबाल के खिलाफ शिकायतों के बाद जांच का सिलसिला शुरू हुआ।
संपत्तियों को लेकर भी रहा विवाद
जुलाई 2018 में सहारनपुर अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) न्यायालय ने बसपा एमएलसी महमूद अली एवं पूर्व एमएलसी हाजी इकबाल समेत चार लोगों द्वारा एक महिला से खरीदी गई 2564.71 वर्ग गज भूमि पर बनाए गए मकान को सरकारी संपत्ति घोषित किया था, लेकिन इस मामले में हाईकोर्ट से स्टे ऑर्डर प्राप्त कर लिया गया था। यह मामला काफी समय तक एडीएम (एफ) कोर्ट में विचाराधीन रहा था।
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