बता दें कि 30 सितंबर को सीबीआई ने एफआईआर दर्ज कर एक अक्तूबर को सहारनपुर में कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। कंप्यूटर की हार्ड डिस्क, डायरी सहित कई अहम दस्तावेज बरामद कर उन्हें आधार बनाकर प्रवर्तन निदेशालय ने केस दर्ज किया है।
केस में लिखा है कि अपने कार्यकाल में इन जिलाधिकारियों ने सहारनपुर में 2012 से 2015 के बीच नियमों की अनदेखी कर आपराधिक षड्यंत्र रचते हुए 13 खनन पट्टों का नवीनीकरण कर दिया था। इसमें ई-टेंडर प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और मैन्युअल पट्टों का नवीनीकरण कर दिया। उस वक्त की सरकार पर भी सवाल उठा। इस दौरान जमकर अवैध खनन किया गया। हर रोज करोड़ों का खनन नदियों में किया गया।
इन पर ईडी ने दर्ज किया है मुकदमा
दो आईएएस अधिकारियों के अलावा पट्टा धारकों महमूद अली, दिलशाद, मोहम्मद इनाम, नसीम अहमद, अमित जैन, विकास अग्रवाल, मोहम्मद वाजिद, मुकेश जैन, पुनीत जैन को नामजद किया गया है। इस मुकदमे में महबूब आलम भी नामजद है, लेकिन महबूब की मौत हो चुकी है। आरोपियों में अधिकतर सहारनपुर के मिर्जापुर थाना क्षेत्र के रहने वाले है, जबकि विकास अग्रवाल देहरादून निवासी है।
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