फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

'आत्महत्या के लिए पूर्व पार्षद व पुलिस जिम्मेदार...', थाने में नहीं हुई सुनवाई

Mon, 23 Sep 2019 02:18 AM IST
मेरठ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
विज्ञापन
विज्ञापन
मेरठ। जलकल विभाग के कर्मचारी अमरदेव की आत्महत्या के मामले में रविवार को जमकर बखेड़ा हुआ। अमरदेव के परिजनों और व्यापार संघ के नेताओं ने मेडिकल थाना पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाया। कहा कि एक पूर्व पार्षद लगातार उत्पीड़न कर रहा था। इंस्पेक्टर मेडिकल से भी गुहार लगाने पर इंसाफ नहीं मिला था, जिससे परेशान होकर अमरदेव ने फांसी लगाकर जान दी।
विज्ञापन


नगरायुक्त के स्टेनो रामपाल के बेटे अमरदेव जलकल विभाग में स्थायी कर्मचारी थे। शनिवार सुबह अमरदेव ने अजंता कालोनी स्थित अपने आवास पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया था। पिता रामपाल ने एक पूर्व पार्षद पर उत्पीड़न का आरोप लगाकर तहरीर दी। लेकिन पुलिस ने मुकदमा दर्ज करने से इंकार कर दिया।

रविवार को अमरदेव के परिजन, व्यापारी नेता जीतू नागपाल, शैंकी वर्मा और अन्य व्यापारी नेता मेडिकल थाने पहुंचे और हंगामा कर दिया। इस दौरान व्यापारियों की इंस्पेक्टर मेडिकल प्रशांत मिश्रा से तीखी नोकझोंक हो गई। पिता रामपाल ने थाने में तहरीर देते हुए आरोप लगाया कि अमरदेव का 350 गज का एक प्लॉट सरायकाजी में है।

यह प्लॉट एक पूर्व पार्षद को दिलवाया था। लेकिन पूर्व पार्षद ने प्लॉट का पैसा अदा नहीं किया था। जबकि पूर्व पार्षद ने प्लॉट में से 150 गज जमीन दूसरे व्यक्ति को बेच दी। अमरदेव ने इसका पता चलने पर पूर्व पार्षद से पैसे मांगे तो बदले में हत्या की धमकी मिली थी। जिसके बाद अमरदेव ने बाकी 200 गज जमीन की बाउंड्री करा दी थी। प्लॉट को लेकर अमदेव परेशान रहता था, जिसने आत्महत्या कर ली।

विभाग से भी जुड़ा है मामला
अमरदेव की मौत के बाद निगम कर्मचारियों में रोष व्याप्त है। निगम कर्मचारी संघ का कहना है कि पूर्व नगर स्वास्थ्य अधिकारी और एक आउट सोर्स कर्मचारी अमरदेव सहित सभी 23 कर्मचारियों की नियुक्ति को लेकर शासन में शिकायत कर रहे हैं, जिससे सभी कर्मचारी परेशान हैं। कर्मचारियों को लगातार ब्लैकमेल किया जा रहा था।
विज्ञापन

थाने में नहीं हुई सुनवाई
रामपाल और व्यापारियों ने थाने में आरोप लगाते हुए कहा कि विगत एक अगस्त को अमरदेव मेडिकल थाने में गया था। जहां अमरदेव ने कहा कि पूर्व पार्षद ने उत्पीड़न करते हुए प्लॉट पर कब्जा कर लिया। जिस पर मेडिकल इंस्पेक्टर ने कहा था कि इसमें फैसला करा दिया जाएगा। पुलिस यदि उसी समय कार्रवाई करती तो अमरदेव की जान बच सकती थी।

आत्महत्या अपराध नहीं
इंस्पेक्टर मेडिकल प्रशांत मिश्रा का कहना है कि कर्मचारी ने आत्महत्या की है। कोई सुसाइड नोट नहीं मिला। कर्मचारी की नौकरी का मामला कोर्ट में चल रहा है। पूर्व पार्षद पर कैसे मुकदमा दर्ज कर दिया जाए। पुलिस आत्महत्या को अपराध नहीं मानती।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें