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Meerut News: आम की अच्छी पैदावार के लिए मार्च में करें खास देखभाल

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आम के बौर पर कीटों का प्रभाव स्रोत कृषि विज्ञान केंद्र
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संवाद न्यूज एजेंसी
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हस्तिनापुर। आम की भरपूर पैदावार के लिए फरवरी और मार्च का महीना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी समय आम के पेड़ों पर बौर (फूल) आने और फलों के बनने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। इस संबंध में स्वामी कल्याण देव कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. नवीन चंद्र के अनुसार इस समय यदि बागों की सही तरीके से देखभाल की जाए तो उत्पादन में कई गुना तक बढ़ोतरी हो सकती है।

नवीन चंद्र ने बताया कि जब तक पेड़ों पर बौर निकल रहे हों तब तक सिंचाई नहीं करनी चाहिए। इस समय पानी देने से पेड़ों पर फूलों की जगह नई पत्तियां निकलने लगती हैं, जिससे पैदावार प्रभावित होती है। जब फूल झड़कर फल मटर के दाने के बराबर हो जाएं, तब हल्की सिंचाई शुरू करनी चाहिए, इससे फलों के झड़ने की संभावना कम हो जाती है। मार्च माह में आम के बागों में कीट और रोगों का खतरा भी बढ़ जाता है। भुनगा कीट फूलों का रस चूसकर उन्हें सुखा देता है, जिससे बौर नष्ट हो जाते हैं।
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यह करें उपाय
कीट से बचाव के लिए इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल की एक मिली दवा दो लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करने की सलाह दी है। उन्होंने बताया कि खर्रा रोग (पाउडरी मिल्ड्यू) में बौर पर सफेद पाउडर जैसा पदार्थ जम जाता है। इसके नियंत्रण के लिए घुलनशील सल्फर या हेक्साकोनाजोल का छिड़काव प्रभावी माना गया है। फूल और छोटे फलों को झड़ने से बचाने के लिए पोषक तत्वों का छिड़काव भी जरूरी है। इसके लिए प्लानोफिक्स का एक मिली घोल चार लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव किया जा सकता है। इसके अलावा बोरोन का प्रयोग भी फलों को झड़ने और फटने से बचाने में सहायक होता है।
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बागों में रखें साफ-सफाई

कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. राकेश तिवारी ने बताया कि बागों में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। पेड़ों के नीचे गिरे पत्तों और सूखे बौर को हटाकर हल्की गुड़ाई करनी चाहिए ताकि जड़ों को पर्याप्त हवा मिल सके। साथ ही कीटनाशकों का छिड़काव हमेशा शाम के समय और निर्धारित मात्रा में ही करना चाहिए, जिससे पौधों और परागण करने वाले कीटों को नुकसान न पहुंचें।
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