फसलों के अच्छे उत्पादन के लिए किसानों को सहफसली खेती और उन्नत प्रजाति के बीजों का इस्तेमाल करना चाहिए। फसलों की बुवाई के समय बीज का शोधन भी जरूरी है। नैनो यूरिया का फसलों में इस्तेमाल बढ़ाना चाहिए। यह बात कृषि वैज्ञानिकों ने सर छोटूराम इंजीनियरिंग कालेज परिसर में आयोजित तीन दिवसीय किसान मेले में गोष्ठी को संबोधित करते हुए कही।
केवीके हस्तिनापुर के वैज्ञानिक डा. शुभम आर्य ने कहा कि किसानों को गेहूं की अगेती एवं पछेती प्रजातियों की फसलों की बुवाई समय पर की जानी चाहिए। अगर किसान फसलों की बुवाई में इस्तेमाल होने वाले बीज का शोधन करके और सहफसली खेती करें तो उत्पादन भी बढ़ेगा और किसानों की आय भी। मोदीपुरम आईआईएफएसआर के डा. ललित कुमार ने कहा कि किसानों को नैनो यूरिया का फसलों में प्रयोग करना चाहिए। इससे फसलों की लागत भी कम होगी और उत्पादन भी बढ़ेगा। डा. देवेन्द्र कुमार ने कहा कि किसानों को आर्गेनिक खेती पर आना चाहिए। इससे फसलों की लागत कम होगी। भूमि का स्वास्थ्य ठीक रहेगा और उत्पादन भी बढ़ेगा। आने वाले समय में ऐसी फसलों की मांग बढ़ेगी। उप कृषि निदेशक मेरठ मण्डल मेरठ सुरेन्द्र सिंह प्राविधिक अधिकारी ने किसानों को जल संरक्षण करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि पानी का दोहन रोकने के लिए किसानों को पहल करनी होगी। किसान खेतों की मेड बनाएं। ग्राम पंचायतों में तालाबों का जीर्णोद्धार हो। उप कृषि निदेशक नीलेश चौरसिया ने किसानों को सरकारी योजनाओं की जानकारी दी। अपर जिला कृषि अधिकारी डॉ. ओमपाल सिंह ने कार्यक्रम का संचालन किया।
मेले में लगी स्टॉल से किसानों ने ली जानकारी
- किसान मेले में कृषि संबंधित विभाग एवं निजी कृषि निवेश विक्रेताओं द्वारा स्टाल लगाकर उत्पादों का प्रदर्शन किया गया। खेतों की सिंचाई करने के लिए स्प्रिंग्लर, पाइप, उन्नत बीज, ट्रैक्टर, कीटनाशक आदि की जानकारी दी गई। किसान मेले का आज बृहस्पतिवार को समापन किया जाएगा।