पश्चिमी उत्तर प्रदेश में फूड सप्लीमेंट बनाने का काला कारोबार मालामाल कर रहा है। हेल्थ क्लब में फिटनेस की चाह रखने वाले नौजवानों के साथ खिलवाड़ हो रहा है। क्योंकि फूड सप्लीमेंट के नाम पर लिक्विड पेस्ट में थोड़ा सा प्रोटीन, कैल्शियम और बड़ी मात्रा में स्टेरॉयड बनाकर धोखा दिया जा रहा है। ताजा कार्रवाई के बाद एफडीए के रडार पर देहात क्षेत्र के आधा दर्जन गांवों के अलावा शहर के कई क्षेत्र रडार पर आ गए हैं।
महज 50 से 60 रुपये की लागत में तैयार होने वाला यह उत्पाद बाजार में 200 रुपये से लेकर 500 रुपये की कीमतों पर बेचा जाता है। एक साल में एफडीए की टीम हापुड़ रोड, मोहकमपुर दिल्ली रोड, वेदव्यासपुरी और भावनपुर में ऐसी चार अवैध फैक्ट्री पकड़ चुकी है। जिसमें एक फैक्ट्री एसटीएफ की मदद से पकड़ी गई। जहां से भारी मात्रा में फूड सप्लीमेंट पकड़ा गया। लेकिन एफडीए से इसका कोई लाइसेंस तक नहीं लिया गया था। अब इन सारे मामलों में सैंपल रिपोर्ट आने के बाद कानूनी कार्रवाई की तैयारी है।
धोखे का मुनाफा
एफडीए के अधिकारी कहते हैं कि सबसे ज्यादा हेल्थ क्लब के अंदर फूड सप्लीमेंट का इस्तेमाल किया जाता है। जिम जाने वाले युवाओं को खासतौर पर बताया जाता है कि ऐसे फूड सप्लीमेंट से शरीर मजबूत होगा और सेवन करने के बाद सेहत पर असर भी दिखाई देता है। लेकिन ऐसा स्टेरॉयड के कारण दिखाई देता है। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी जेपी सिंह का कहना है कि स्टेरॉयड खाने से भूख ज्यादा लगती है, लेकिन इसके शरीर में जाने से दूसरे भी नुकसान हैं, जो काफी खतरनाक हैं। इस कारण से फूड सप्लीमेंट पर एफडीए की सबसे ज्यादा नजर रहती है।
गांव में तैयार हो रहा फूड सप्लीमेंट
एफडीए को इनपुट मिला है कि शहरी क्षेत्र में कार्रवाई होने के बाद अब ग्रामीण क्षेत्रों में फूड सप्लीमेंट तैयार करने का काम चल रहा है। इसी के तहत बुधवार शाम को गेसूपुर गांव में छापा मारकर करीब दो लाख रुपये से अधिक का फूड सप्लीमेंट पकड़ा गया। जिसके बाद करीब आधा दर्जन गांव एफडीए के रडार पर हैं, जिनके बारे में इनपुट जुटाया जा रहा है। वहीं, शहर के उन हिस्सों पर भी नजर है, जहां इस तरह स्टेरॉयड युक्त फूड सप्लीमेंट तैयार हो रहा है।