मेरठ/सरधना/दौराला। हाईकोर्ट और सरकार के आदेश के बाद सोमवार को पुलिस प्रशासन ने जातिगत भेदभाव को मिटाने के लिए जाति लिखे बोर्ड को उतार दिए। कई वाहनों के चालान काटे गए और सोशल मीडिया की भी निगरानी शुरू कर दी गई। कपसाढ़ गांव के प्रधान के बेटे को सोशल मीडिया पर भड़काऊ जातिगत टिप्पणी करने पर गिरफ्तार किया गया।
सोमवार रात को एडीजी भानु भास्कर ने तमाम पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की बैठक लेकर सरकार के आदेश का पालन करने के निर्देश दिए। इसके बाद प्रशासन हरकत में आ गया। शहर से लेकर देहात तक जाति लिखे बोर्ड को सोमवार देर रात से ही उतारना शुरू कर दिया गया। सरधना क्षेत्र के कपसाढ़ और सलावा गांवों में स्थापित सम्राट मिहिर भोज द्वार और बोर्ड हटवा दिए। दौराला के दादरी, शाहपुर जदीद गांव समेत कई गांवों से मंगलवार को पुलिस बल ने बोर्ड उतरवा दिए। इसके अलावा टोल प्लाजा पर पुलिस ने अभियान चलाकर वाहनों पर लिखी जाति वाले स्टीकर हटवाए। बोर्ड उतरवाने के दौरान पुलिस बल तैनात रहा।
सम्राट मिहिर भोज को अपनी अपनी जाति का बताने पर गुर्जर और राजपूत समाज में होड़ लगी थी। शहर से लेकर देहात तक उनके बोर्ड लगाए जा रहे थे। वर्तमान में कपसाढ़ और सलावा में बोर्ड लगाने पर दादरी में गुर्जर स्वाभिमान पंचायत का ऐलान किया गया और बवाल हो गया। पुलिस ने 22 लोगों को नामजद करते हुए जेल भेज दिया। हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए जातिगत भेदभाव मिटाने के लिए आदेश जारी किए। जिस पर सरकार के मुख्य सचिव दीपक कुमार ने भी प्रदेश में आदेश जारी कर दिए। सोमवार देर रात एडीजी भानु भास्कर ने डीआईजी, कमिश्नर, डीएम, एसएसपी समेत सभी अफसरों की बैठक लेकर दिशा निर्देश दिए। इसके बाद प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया और रात में ही बोर्ड उतरावने शुरू कर दिए।
सोमवार देर रात करीब 3 बजे भारी पुलिस बल कपसाढ़ और सलावा गांव पहुंचा और दोनों स्थानों से द्वारों को हटवाकर उनका मलबा भी साथ ले गया। मंगलवार दोपहर तक शहर से लेकर देहात में ये कार्रवाई चलती रही। पुलिस ने सरकार और कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए दोबारा बोर्ड लगाने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी। सीओ आशुतोष कुमार ने बताया कि शासन के आदेशों का पालन करते हुए सभी विवादित बोर्ड हटाए जा रहे हैं। साथ ही वाहनों पर लगे जाति-विशेष के स्टीकर भी हटवाए जा रहे हैं। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ चालान की कार्रवाई भी की जाएगी।
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आदेश से पहले दिखाई होती तत्परता, तो नहीं बिगड़ता माहौल
दौराला। जाति लिखे स्वागत बोर्ड लगाने का शहर से लेकर देहात तक एक कल्चर के रूप में चलने लगा था। इसके बाद महापुरुषों को अपनी अपनी जाति का बताने पर विवाद शुरू होने लगा। लगातार बोर्ड लगाए जाने की बाढ़ सी आ गई, लेकिन पुलिस प्रशासन ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया और दादरी गांव का बवाल प्रशासन की लापरवाही को दर्शाता है। यदि, इन मामलों में पुलिस प्रशासन ने शुरू में ही तत्परता दिखाई होती तो विवाद नहीं होते। अब, आदेश के बाद जिन गांवों में जाति लिखे बोर्ड लगे हुए हैं, सभी को हटाया जा रहा है।
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सोशल मीडिया पर बहस तेज
सरधना। प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग शासन के निर्णय का समर्थन कर रहे हैं, तो कई सामाजिक संगठनों और समुदायों ने इसे एकपक्षीय कार्रवाई बताया है। मामला अब भी संवेदनशील बना हुआ है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जब तक हाईकोर्ट से इस विषय में कोई अंतिम निर्णय नहीं आ जाता, तब तक किसी भी जाति विशेष के नाम पर सम्राट मिहिर भोज से जुड़े कार्यक्रम, बैठकें या प्रतीकात्मक निर्माण की अनुमति नहीं दी जाएगी।
मिहिर भोज के बोर्ड उखाड़कर थाने ले गई पुलिस
फलावदा। हाईकोर्ट के आदेश पर पुलिस ने फोर्स व प्रशासनिक अधिकारियों ने जाति आधारित गांवों में लगे मिहिर भोज व अन्य जातिगत बोर्ड उखाड़कर थाने ले गई। ग्रामीण हंगामा न करे इसके लिए मंगलवार को थाना प्रभारी दिनेश प्रताप सिंह ने फोर्स के साथ नगर व देहात में फ्लैग मार्च निकाला। पुलिस क्षेत्र के गांव गुडम्ब, मन्दवाड़ी, नैडू, कुण्डा, पिनाई, सकौती आदि गांवों से मिहिर भोज और अन्य जातिगत बोर्ड उखाड़कर थाने ले गई।
दौराला - शाहपुर जदीद गांव से उतारा गया जाति लिखा बोर्ड। स्रोत : संवाद