मेरठ। बदलते मौसम ने ट्रेनों की रफ्तार पर भी ब्रेक लगा दिए हैं। कोहरे और स्मॉग में दृश्यता कम होने के कारण ट्रेनें पूरी क्षमता से नहीं दौड़ रही हैं। इसके चलते लंबी दूरी की अधिकतर ट्रेनें एक से चार घंटे तक लेट हो रही हैं। सोमवार को भी अधिकांश ट्रेनें विलंब से पहुंचीं। ट्रेनों के समय पर नहीं चलने से नौकरी पर जाने वाले दैनिक यात्रियों को अधिक परेशानी हो रही है।
वैसे तो ट्रेनों में फॉग सेफ्टी डिवाइस लगी है, मगर घने कोहरे को यह पूरी क्षमता से भेद नहीं पाती है। ऐसे में ट्रेनों को कम रफ्तार से चलाना पड़ता है। इसी कारण कोहरे में ट्रेनें लेट आ रही हैं। इसके चलते दैनिक यात्री अपने कार्यस्थलों पर समय से नहीं पहुंच पा रहे हैं। सोमवार को दिल्ली जालंधर इंटरसिटी सुपर एक्सप्रेस चार घंटे देर से आई। नौचंदी एक्सप्रेस 2:24 घंटे देर से पहुंची। हरिद्वार एक्सप्रेस एक घंटे, योगा एक्सप्रेस एक घंटे, दिल्ली-सहारनपुर मेमू स्पेशल दो घंटे, रेवाड़ी-मेरठ कैंट एक घंटे, छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस तीन घंटे, स्वर्ण मंदिर एक्सप्रेस एक घंटे, कलिंग उत्कल एक्सप्रेस एक घंटे, लक्ष्मीबाईनगर-योगनगरी एक्सप्रेस सवा घंटे देरी से पहुंची।
दिल्ली में नौकरी करने वाले दैनिक यात्री तरुण मेहता, पीयूष कुमार, कुलदीप सिंह, मोहित जयंत, शुभम द्विवेदी का कहना है कि ट्रेनों के लेट होने के कारण वे रोजाना अपने काम पर देर से पहुंच रहे हैं। ऐसे में मेरठ से सुबह छह बजे दिल्ली के लिए ईएमयू चलानी चाहिए। साथ ही मेरठ से अंबाला के लिए चलने वाली पैसेंजर बहाल होनी चाहिए।
स्पेशल ट्रेनों का बुरा हाल, दिन के बजाय रात में आ रही
मेरठ। रेलवे की ओर से चलाई जा रही स्पेशल ट्रेनों का तो हाल सबसे बुरा है। ये ट्रेनें कभी भी समय पर नहीं आ रही हैं। मेरठ से होकर कटिहार-अमृतसर, साबरमती-हरिद्वार और हुबली-योगनगरी ऋषिकेश तीन स्पेशल ट्रेनें चल रही हैं। मगर ये तीनों ट्रेनें सबसे ज्यादा देर से आ रही हैं। हुबली और कटिहार एक्सप्रेस तो 12 घंटे तक विलंब से दिन के बजाय रात में आ रही है। ऐसे में यात्री अपने टिकट भी निरस्त करा रहे हैं।