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बाढ़ से तबाही: हस्तिनापुर में कई गांवों जलमग्न, ग्रामीणों को खाने-पीने-सोने का संकट, दहशत में कट रही रातें

Sat, 15 Jul 2023 08:05 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

बिजनौर बैराज से गंगा में लगातार पानी छोड़े जाने के बाद गंगा का जलस्तर बढ़ने से हस्तिनापुर खादर क्षेत्रों में बाढ़ जैसे हालात हैं। वहीं खतरे की स्थिति देखते हुए हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं।
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flood - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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हस्तिनापुर खादर क्षेत्र के कई गांव में बाढ़ का पानी पहुंच चुका है। कई गांवों की स्थिति नाजुक बनी हुई है। गंगा के उफान पर होने के कारण पानी घरों में घुस चुका है। ग्रामीण पानी के बीच ही गुजारा करने को मजबूर हैं। कई गांवों में दिन भर लोग छतों पर खड़े रहकर बाढ़ की स्थिति को देखते रहे। वहीं पानी घरों में होने के कारण जहरीले जीवों के काटने का भी खतरा बढ़ गया है। राशन भीगने के कारण ग्रामीणों को खाने पीने का भी संकट पैदा हो गया है।
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flood - फोटो : Amar Ujala
एडीएम प्रशासन सूर्यकांत त्रिपाठी एसडीएम अखिलेश यादव बाढ़ राहत कार्य के लिए गांव गांव पहुंचकर लोगों से संपर्क कर रहे हैं। अधिकारी उन्हें बाहर पहुंचने की अपील कर रहे हैं। वहीं लोगों ने बताया कि लगातार पानी बढ़ने से परेशानियां बढ़ती जा रही है उनके पास खाने-पीने की सामग्री भी पूरी तरह पानी में भीग चुकी है। रहने को सोने के लिए सुरक्षित स्थान नहीं है लगातार स्थिति बिगड़ती जा रही है पानी का बहाव लगातार निचले इलाके के गांव की ओर लगातार चल रहा है।

बाढ़ के पानी से जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो रहा है लोग एक दूसरे से संपर्क नहीं कर रहे हैं। गांव के रास्ते शमशान पड़े हुए हैं और अधिकारी लगातार लोगों की मदद के बीए निरीक्षण कर रहे हैं और स्थिति का जायजा ले रहे हैं। लतीफपुर किशनपुर आदि गांव में पानी पहुंच चुका है घरों में भी भर गया है।
 

flood - फोटो : Amar Ujala
घरों में पहुंचा बाढ़ का पानी ग्रामीणों की जान जोखिम में
गुरुवार को क्षेत्र के गांव फतेहपुर प्रेम के समीप से गंगा का कच्चा तटबंध टूट गया था जहां से लगातार निकल रहा पानी अब खादर क्षेत्र में तबाही की कहानी लिख रहा है। पिछले दो दिनों में पानी गांव के चारों और भरा हुआ था लेकिन शनिवार को पानी लोगों के घरों के अंदर पहुंच गया जिससे वह पूरी तरह भयभीत हैं और उनका जीना दुश्वार हो गया है।
 

flood - फोटो : Amar Ujala
क्षेत्र के गांव लतीफपुर और किशनपुर में सैकड़ों घरों में गंगा की बाढ़ का पानी पहुंच चुका है लोग सुरक्षित स्थान पर जाने के लिए पलायन करने की तैयारी में हैं अपने सामान को सुरक्षित करने में लगे हैं। घरों में पानी पहुंचने से हड़कंप मच गया, जिसे देखते हुए एडीएम प्रशासन सूर्यकांत त्रिपाठी एवं एसडीएम अखिलेश यादव ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया।

उन्होंने पीड़ित परिवार के लोगों को घर पर जाकर हर संभव मदद का आश्वासन दिया साथ ही कहा कि समय रहते सुरक्षित स्थान पर चले जाइए सभी व्यवस्था प्रशासन की ओर से की गई है।

 

flood - फोटो : Amar Ujala
उधर, राज्यमंत्री राज्यमंत्री एवं क्षेत्रीय विधायक दिनेश खटीक ने भी कहा है कि हर संभव मदद के लिए शासन प्रशासन के अधिकारी अलर्ट हैं क्षेत्र में बाढ़ राहत कार्यों के लिए एसडीआरएफ एनडीआरएफ और पीएसी की टीम तैनात की गई है लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है और लगा कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचने की अपील की जा रही है जब तक गंगा का जलस्तर कम होता है तब तक लोगों को सुरक्षित स्थान पर जाना होगा।

वर्ष 2021 से लगातार पानी निकलने से खादर क्षेत्र के कई गांव की स्थिति नाजुक होती जा रही है। बाढ़ का पानी घरों में आता देख ग्रामीण खौफ में है। वही पानी लगातार गांव के बाद अब घरों को अपने आगोश में ले रहा है।

 

flood - फोटो : Amar Ujala
इस बाढ़ के पानी में जहरीले जलीय जीव लोगों को प्रभावित कर रहे हैं। लगातार इसमें जहरीले सांप और अन्य जलीय जीव घरों तक पहुंच रहे हैं जिनसे ग्रामीण पूरी तरह भयभीत हो रहे हैं इस समय लोगों का जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो रहा है।
 

Flood in UP - फोटो : Amar Ujala
अगर कम नहीं हुआ जलस्तर तो होगी बड़ी तबाही
पिछले दो दिनों से जल स्तर लगातार खादर क्षेत्र में हालत खराब कर रहा है वही गंगा का जलस्तर अगर अगले 24 घंटे में कम नहीं होता तो खादर क्षेत्र के हालात बद से बदतर हो जाएंगे हालांकि शासन प्रशासन की ओर से हर संभव मदद के लिए प्रशासनिक अधिकारी अलर्ट पर हैं।
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Flood in UP - फोटो : Amar Ujala
अभी गांव छोड़कर सुरक्षित स्थान पर जाने के लिए तैयार नहीं ग्रामीण
हस्तिनापुर के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में प्रशासन के अधिकारी लगातार ग्रामीणों को सुरक्षित स्थान पर जाने के लिए कह रहे हैं परंतु अभी तक ग्रामीण सुरक्षित स्थान पर जाने को तैयार नहीं है जबकि कभी भी और अधिक जलस्तर बढ़कर हर खादर क्षेत्र के हालत नाजुक कर सकता है और ग्रामीणों के लिए परेशानी बढ़ा सकता है।
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