मेरठ। गंगा में श्रद्धालुओं को डूबने से बचाने के लिए घाटों पर फ्लोटिंग जेटी बैरिकेडिंग की व्यवस्था की जा रही है। गंगा घाट पर इससे आगे किसी को गंगा में नहाने की अनुमति नहीं होगी। फ्लोटिंग जेटी की चौड़ाई इतनी है कि इसपर घूमकर पुलिस आसानी से निगरानी कर सकती है। गंगा में चलने वाली वोट भी इससे दूर ही रहेंगी। मेरठ मंडल में इसकी शुरुआत पायलट प्रोजेक्ट के रूप में हापुड़ के ब्रजघाट में की गई है।
मेरठ मंडल में ब्रजघाट, गढ़मुक्तेश्वर, खरकाली, मखदूमपुर में लोग गंगा स्नान के लिए पहुंचते हैं। ब्रजघाट के अलावा अन्य सभी स्नानों पर कच्चे घाट हैं। इन सभी स्थानों पर गंगा में डूबने की घटनाएं होती रही हैं, जिसकी गूंज शासन तक पहुंचती है। भविष्य में गंगा में डूबने से मौत का सिलसिला बंद हो। इसको लेकर सरकार ने फ्लोटिंग जेटी बैरिकेडिंग की व्यवस्था की है।
ब्रजघाट में भी उमड़ती है भीड़
हरिद्वार के बाद ब्रजघाट को भी हरिद्वार की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है। जहां ब्रजघाट में सुंदर घाट बनाए जा रहे हैं। शौचालय, स्नानागार आदि की भी व्यवस्था की गई है। हरिद्वार की तर्ज पर यहां पर भी गंगा स्नान करने वालों की भारी भीड़ उमड़ती है। गंगा स्नान के दौरान कई लोगों की जान जा चुकी है। कार्तिक गंगा स्नान मेले के दौरान गढ़ मुक्तेश्वर ही नहीं ब्रजघाट में भी लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है।
फ्लोटिंग जेटी पर खर्च हुए ढाई करोड़
पायलट प्रोजेक्ट के रूप में ब्रजघाट में गंगा किनारे फ्लोटिंग जेटी बैरिकेडिंग की गई है। इसकी लंबाई लगभग 400 मीटर है। जो गंगा स्नान करने वालों की सुरक्षा में महत्वपूर्ण साबित होगी, जिसपर ढाई करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। - प्रमोद कुमार, अधिशासी अभियंता, ड्रेनेज खंड सिंचाई विभाग