मेरठ। कमालपुर स्थित 50 केएलडी के एफएसटीपी (फीकल सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) और 72 एमएलडी के एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) में खामियां मिली हैं। एसटीपी पर आठ गाड़ियों का नगर निगम से भुगतान लिया जाता है, जबकि वहां पर केवल तीन गाड़ियां ही चलती मिलीं। नमामि गंगे परियोजना भी आठ महीने विलंब बताई गई है। इस पर महापौर और नगर आयुक्त ने नाराजगी जताते हुए संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाई। गाड़ियों के मामले में नगर आयुक्त ने जांच बैठा दी है।
महापौर हरिकांत अहलूवालिया, नगर आयुक्त सौरभ गंगवार, अपर नगर आयुक्त/महाप्रबन्धक (जल) ममता मालवीय, सहायक अभियंता जलकल सुशील कुमार और जल निगम के अधिकारी मंगलवार सुबह कमालपुर स्थित 50 केएलडी के एफएसटीपी और 72 एमएलडी के एसटीपी का निरीक्षण करने पहुंचे। एसटीपी के इनलेट व आउटलेट के सैंपल चेक कराए गए, जो प्राथमिक जांच में सही मिले। महापौर ने 24 घंटे प्लांट चलाकर ट्रीट हुए पानी को बागवानी/हरित पट्टी आदि में यूज कराने के निर्देश दिए। उसके बाद महापौर और नगर आयुक्त ने 50 केएलडी प्लांट के एफएसटीपी का मुआयना किया। प्लांट पर 8 गाड़ियों में से पांच खराब मिलीं। नगर आयुक्त ने जल निगम के अधिकारियों से नाराजगी जताई है। साथ ही जल निगम के सहायक अभियंता अवधेश शर्मा को संबंधित ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
नमामि गंगे की परियोजना भी धीमी
कमालपुर में ही नमामि गंगे परियोजना के तहत 220 एमएलडी का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का शुभारंभ आठ महीने पहले कैबिनेट जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह सेखावत ने किया था। इस प्लांट के चलते से ओडियन नाला और आबू नाले का पानी भी ट्रीट हो जाएगा। आठ महीने बीतने के बावजूद जल निगम द्वारा 220 एमएलडी के प्लांट में कार्य में प्रगति नहीं मिली।
एक गाड़ी पर 1.20 लाख प्रतिमाह खर्च
नगर निगम जलकल विभाग के अधिकारियों ने बताया कि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट पर लगी गाड़ी का काम महानगर में शौचालय से सीवर प्लांट पर लाना है। पांच-छह चक्कर रोजाना लगाना अनिवार्य है। एक गाड़ी पर ड्राइवर समेत करीब 1.20 लाख रुपया खर्च होता है। पांच गाड़ी का भुगतान लगातार हो रहा है और धरातल पर गाड़ी नहीं चलती मिली। महापौर हरिकांत अहलूवालिया का कहना है कि जल निगम और उनके ठेकेदार से वसूली की जाएगी और कार्रवाई भी निश्चित होगी।