ग्राम मौजिजाबाद नांगल निवासी राजपाल शास्त्री का कहना है कि जल निगम की उपेक्षा के चलते वर्तमान में ग्रामीण शुद्ध पेयजल से वंचित हैं। गांव कृष्णा नदी के किनारे है। इसमें प्रदूषित रसायनयुक्त पानी बहता है। जिसका असर गांव के भूमिगत जल स्रोतों पर है।
ग्राम गैडबरा निवासी पूर्व प्रधान विक्रम सिंह राणा का कहना है कि वर्ष 1985 में जल निगम ने क्षेत्र के 11 गांवों को पाइपलाइन के माध्यम से शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए टंकी का निर्माण किया था। अब ग्रामीण दूषित पानी पीने को मजबूर हैं।
ग्राम भड़ल के प्रधान देवेंद्र सिंह राणा का कहना है कि गांव में पेयजल टंकी का निर्माण अरसा पहले हुआ था। इसी टंकी से निकट के गांव निरपुड़ा व धनौरा को भी पेयजल उपलब्ध कराने की योजना थी। तीन वर्षों से टंकी का संचालन निगम ने बंद कर रखा है।
जल निगम के अवर अभियंता विवेक कुमार ने बताया कि पानी की टंकी की समय सीमा 20 वर्ष होती है। मुलसम, दाहा, भड़ल, मौजिजाबाद नांगल और गैडबरा में बनी टंकियों को 35 वर्ष हो चुके हैं। जल निगम की ओर से इन गांवों में नई टंकी के निर्माण का प्रस्ताव शासन को दो वर्ष पूर्व भेजा था। वह अभी स्वीकृत नहीं हुआ है।