कोरोना के मरीजों में ब्लैक फंगस का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। संक्रमित मरीज लगातार मिल रहे हैं। मुख्यत: कोरोना के मरीजों के इलाज के दौरान ज्यादा स्ट्रॉयड और शुगर बढ़ने से यह बीमारी होती है। इसमें आंख सूज जाना। पुतली का न घूमना और मुहं में तालु काला हो जाना आदि लक्षण हैं। यह गम्भीर रोग बनता जा रहा है।
एक मरीज को 14 दिन लगते हैं इंजेक्शन
मेडिकल के कोविड अस्पताल के प्रभारी डॉ धीरज बालियान ने बताया की ब्लैक फंगस के एक मरीज को 14 दिन तक 20-20 मिलीग्राम की एक-एक डोज लगाई जाती है। मेडिकल में फिलहाल 66 इंजेक्शन का स्टॉक है। हालांकि जिस रफ्तार से मरीज बढ़ रहे हैं और ज्यादा इंजेक्शन की जरूरत पड़ेगी।
म्यूकरमायकोसिस (ब्लैक फंगस या काली फफूंद) कोविड की पहली लहर के दौरान ऐसे मरीजों की संख्या देश में बहुत कम थी। देश में महाराष्ट्र और गुजरात में खास तौर पर म्यूकरमायकोसिस के मामले बढ़ रहे थे, लेकिन अब मेरठ और आसपास के जिलों में काफी संख्या में मरीज मिल रहे हैं।
कोविड का इलाज करने के दौरान स्ट्रॉयड के ज्यादा इस्तेमाल से और शुगर बढ़ने के कारण आंख में बहुत ज्यादा सूजन आ जाती है यह इसका मुख्य लक्षण है। मरीजों के साथ भी यही हुआ है इनकी एक- एक आंख बुरी तरह से सूजी हुई है।