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पांच करोड़... 50 राउंड फायरिंग...150 पुलिसकर्मी... और फाइव स्टार होटल में पुलिस की पार्टी

Sun, 23 Jul 2017 08:48 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
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मुख्य आरोपी अनुज और डॉक्टर श्रीकांत गौड़
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दिल्ली पुलिस ने चिकित्सक की बरामदगी के बाद शहर के महंगे पांच सितारा होटल में दावत की। टीम इसी होटल में पिछले कई दिनों से डेरा डाले हुए थी। इस ऑपरेशन के दौरान पुलिस टीम का महंगी गाड़ियों में घूमना, शहर के महंगे होटल में ठहरना और दावत उड़ाना कई अहम सवाल खड़े कर रहा है। आखिर इस टीम पर इतना खर्च कहां से हुआ?
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छह जुलाई को अपह्त चिकित्सक की लोकेशन मेरठ में मिलने के बाद से ही दिल्ली पुलिस की टीमें मेरठ में जमी थी। बागपत रोड स्थित गॉडविन जैसे महंगे होटल में टीम ठहरी थी। होटल में रहने के अलावा खाने का भी खर्चा काफी महंगा है। पुलिस के पास इनोवा जैसी गाड़ियां थी जिनमें वह घूम रहे थे। शताब्दी नगर के लोगों के अनुसार दबिश के लिए भी टीमें सफेद रंग की इनोवा आदि गाड़ियों से पहुंचे थे। इस गाड़ी का किराया भी ढाई से तीन हजार रुपये प्रतिदिन बैठता है।  चिकित्सक की बरामदगी के बाद पुलिस टीम सीधे होटल पहुंची और यहां खूब जश्न मना और पार्टी हुई। जाहिर है, इसमें भी अच्छा खर्च ही आया होगा। चर्चा तो यह है कि पूरी मुहिम पर नौ से दस लाख रुपये खर्च हुए हैं। यह खर्च कहां से आया, यह यक्ष प्रश्न है। हालांकि कहा जा रहा है कि यह खर्च उस कैब कंपनी ने उठाया जिसकी गाड़ी से चिकित्सक का अपहरण हुआ पर इस रकम को खर्च करने की इजाजत कहां से मिली।

नियमों से भी खिलवाड़

आरोपी अनुज का घर और प्रमोद के घर के बाहर खड़ी कार
मुठभेड़ के बाद दिल्ली पुलिस का होटल मे जश्न मनाया, पार्टी करना। सरकारी नियम कायदे इसकी इजाजत नहीं देते हैं। क्या रात को एक होटल में पुलिस इस तरह जश्न मना सकती है। चिकित्सक की बरामदगी के बाद दिल्ली पुलिस पकडे़ गए बदमाशों को परतापुर थाने ले जाने की बजाय लेकर सीधे होटल में गई। यदि होटल से बदमाश भाग जाते या कोई हादसा हो जाता तो उसका जिम्मेदार कौन होता ? चिकित्सक की बरामदगी और बदमाशों की गिरफ्तारी के बाद बृहस्पतिवार तक भी दिल्ली पुलिस लोकल मीडिया के सामने नहीं आई। मीडिया के सामने ना तो चिकित्सक को पेश किया गया और ना ही बदमाशों को। सवाल उठता कि आखिर दिल्ली पुलिस ने ऐसा क्यों किया। 

क्यों नहीं बुलाई फोरेंसिक टीम
मोहल्ले वालों  के अनुसार मुठभेड़ के दौरान सोहनवीर के घर के अंदर और बाहर का फर्श खून में सना था। पुलिस ने पानी डालकर खून को साफ किया। सवाल उठता है कि आखिर पुलिस ने ऐसा क्यों किया। उसे खून साफ करने की इतनी क्या जल्दी थी। इसकी जांच होती। फोरेंसिक टीम जांच करती तो कुछ और तथ्य सामने आ सकते थे।

दिल्ली के प्रीत विहार इलाके से छह जुलाई को पांच करोड़ रुपये की फिरौती के लिए अगवा डॉ.श्रीकांत और पकड़े गए चार बदमाशों को लेकर दिल्ली पुलिस की टीम बृहस्पतिवार को दिल्ली पहुंच गई। मुठभेड़ के बाद काबू किए गए बदमाशों की पहचान रोहटा रोड, मेरठ निवासी प्रमोद कुमार (44), गांव खडी, मीरापुर, मुजफ्फरनगर निवासी अमित कुमार (37), शताब्दी नगर, मेरठ निवासी सोहनवीर गुर्जर (49) और गांव शब्बीरपुर, बडगांव, सहारनपुर निवासी नेपाली उर्फ गोवर्धन (44) के रूप में हुई है। प्रमोद के पैर में गोली लगी है। मुख्य साजिशकर्ता दोनों भाई गांव दादरी, दौराला, मेरठ निवासी सुशील मोतला (32) और अनुज मोतला (28) व दो अन्य आरोपी गौरव शर्मा और विवेक मोदी अभी फरार हैं।

ओला कंपनी से फिरौती मांगने की बनाई थी योजना

पुलिस कार्रवाई करते हुए मेरठ पहुंची
पूर्वी रेंज के संयुक्त आयुक्त रविंद्र यादव ने बताया कि सुशील व अनुज ने कई माह पूर्व ओला कंपनी से फिरौती मांगने की योजना बनाई थी। इसके लिए 4 जुलाई को फर्जी कागजात से एक वैगनआर कार ओला में रजिस्टर्ड करवाई। डाक्टर के अपहरण के बाद कैब को मेरठ ले जाया गया। इधर, ओला कैब को फिरौती की कॉल मिली तो पुलिस हरकत में आ गई। दो डीसीपी, चार एसीपी, पूर्वी रेंज के स्पेशल स्टाफ, एएटीएस, स्पेशल सेल की टीम छानबीन में लगी। यूपी पुलिस का भी सहयोग लिया गया। बदमाश श्रीकांत के मोबाइल से कॉल कर रहे थे। लोकेशन गाजियाबाद, बुलंदशहर, बागपत, हापुड़, मेरठ, बिजनौर, मुजफ्फरनगर और हरिद्वार की मिल रही थी। 150 पुलिस कर्मियों की टीम को अलग-अलग  स्थानों पर लगाया गया। एक सुराग पर रविवार को पैसे लेने के बहाने मेरठ के सकोती में पुलिस से बदमाशों की हल्की मुठभेड़ भी हुई, लेकिन बदमाश मौके पर कार छोड़कर भागने में कामयाब हो गए।    

इधर, पुलिस को बुधवार दोपहर सूचना मिली कि बदमाशों ने श्रीकांत को शताब्दी नगर में सोहनवीर गुर्जर के मकान में रखा है। मुखबिरों ने बताया कि नेपाली नामक बदमाश की मदद से डॉक्टर को हरिद्वार में शिफ्ट किया जाएगा। इसके बाद मेरठ के मकान की घेराबंदी की गई।

आरोपियों के पास से यह सामान हुआ बरामद...

पुलिस कार्रवाई में सामने आया सच
पुलिस को पता चला कि सुशील व अनुज ने पूरी साजिश रची। दोनों ही ओला में पहले काम कर चुके थे। इसके लिए उन्होंने अपने पड़ोसी गौरव शर्मा व विवेक उर्फ मोदी का साथ लिया। सुशील की बुआ का लड़का प्रमोद जो मेरठ का बदमाश है, उसने श्रीकांत को छुपाने का इंतजाम, हथियार व अन्य लोगों का इंतजाम कराया। सोहनवीर के मकान में श्रीकांत को कुछ समय के लिए छुपाया गया, वहीं अमित व नेपाली को लालच देकर शामिल किया गया। फिलहाल मुख्य आरोपियों समेत चार आरोपी फरार हैं।  

दो पिस्टल, 18 कारतूस,  एक वैगनआर कार, चार एल्युमिनियम मास्क (गन्ने के खेत में भागने के लिए), भागने के दौरान हाथों व पैरों पर लपटने के लिए एल्युमिनियम फॉयल, रबर बैंड और भारी मात्रा में फर्जी दस्तावेज बरामद हुए हैं।

आईपीएस, एटीएस अफसर भी शामिल थे मुठभेड़ में 
मेरठ। मुठभेड़ के मामले में दिल्ली पुलिस की ओर से परतापुर थाने में चार बदमाशों के खिलाफ जानलेवा हमले और 25 आर्म्स एक्ट में मुकदमा दर्ज कराया है। डीसीपी ईस्ट ओमवीर सिंह विश्नोई की ओर से घटना की रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।

अपहरण के बाद सवालों के घेरे में ओला कैब

पुलिस को देख भीड़ इकट्ठा हुई
प्रीत विहार इलाके में डॉक्टर श्रीकांत के अपहरण के मामले में ओला कैब की ओर से घोर लापरवाही बरते जाने की बातें सामने आ रही हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बदमाशों ने ओला से पैसा वसूलने के लिए पांच-छह माह पूर्व योजना बना ली थी। इसके लिए सुशील व अनुज ने फर्जी दस्तावेज से ओला में कैब लगाने की प्रक्रिया शुरू की। प्रक्रिया के दौरान जो भी दस्तावेज दिए गए वह किसी रामबीर नामक चालक के नाम से दिए गए। कैब की मालिक विनिता देवी नामक महिला को बताया गया। आरोपियों ने ओला का वेरिफिेशन करने वाले वेंडर को कुछ रुपये देकर जल्दी ही वेरिफिकेशन करवा लिया। इधर, अभी रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया जारी थी कि बदमाशों ने श्रीकांत को प्रीत विहार से अगवा कर लिया।      

सुशील व अनुज अच्छी तरह जानते थे कि ओला के सामने साख बचाने के लिए पांच करोड़ की रकम कुछ भी नहीं है। यदि डॉक्टर श्रीकांत को कुछ हो जाता तो इससे पूरे विश्व में ओला की बड़ी बदनामी होती। इसलिए ओला के अधिकारी बदमाशों की मांगों के आगे झुक भी गए।

सुशील-अनुज थे ब्लैक लिस्ट, ओला से लेना चाहते थे बदला

यहां छिपा रखा था
इसके अलावा बदमाशों ने पांच करोड़ रुपये की मांग की थी । पुलिस की एक टीम ओला अधिकारियों द्वारा उपलब्ध कराए पांच करोड़ रुपये लेकर दौराला के पास सकोती पहुंची थी। लेकिन बदमाशों ने पांच-पांच सौ के नोट लेने से मना कर दिया था। बदमाशों के कहने पर पुलिस ने मेरठ व मुजफ्फरनगर से पांच करोड़ रुपये के नोटों को दो-दो हजार रुपये के नोटों में बदला था। लेकिन पुलिस का आभास होने पर बदमाश कार छोड़कर सकोती से फरार हो गए थे। कार में दो खाली बैग और एल्युमीनियम के मॉस्क बरामद हुए थे।

पुलिस की छानबीन में पता चला है कि ओला कैब ने सुशील व अनुज को ब्लैक लिस्ट किया हुआ था। दरअसल दोनों भाई पहले ओला में चालक रह चुके थे। इनकी अपनी कैब हुआ करती थी। लेकिन सवारियों से दुर्व्यवहार और अन्य शिकायतों के कारण दोनों को ब्लैक लिस्ट कर दिया था। इसी बात से दोनों नाराज थे और बदला लेना चाहते थे।

डॉक्टर अपहरण मामले में मुख्य आरोपी कोसों दूर

मुठभेड़ के दौरान कमरे की फोटो
दिल्ली के डॉक्टर श्रीकांत के अपहरण मामले के मुख्य आरोपी पुलिस से अभी कोसो दूर है। उनके परिजन व रिश्तेदारों को पुलिस ने उठा रखा है। बुधवार रातभर आरोपियों की तलाश में दिल्ली और मेरठ पुलिस खतौली में दबिश देती रही। लेकिन उनका सुराग नहीं लगा। डॉक्टर की बरामदगी की बाद भी बुधवार रात दोनों भाइयों ने ओला कंपनी में फिरौती के लिए कॉल की। जिनकी लोकेशन खतौली में बताई गई। दिल्ली और मेरठ पुलिस की संयुक्त टीम ने रातभर खतौली में आरोपियों की तलाश में दबिश दी, लेकिन बाद में उनका फोन स्वीच ऑफ हो गया। पुलिस की पकड़ से अभी मुख्य आरोपी दोनों भाई अनुज व सुशील और उनके दो साथी गौरव और विवेक उर्फ सौरभ कोसो दूर है। उनकी तलाश में अभी दिल्ली पुलिस की एक टीम मेरठ में डेरा डाले हुई है। 

स्टीकर से बदमाशों तक पहुंची पुलिस    
जिस वैगनआर कार से डॉ. श्रीकांत को अगवा किया था। बदमाशों ने उसे पंद्रह सौ रुपये देकर फर्जी कागजात के आधार पर ओला कंपनी में रजिस्टर्ड कराया था। पुलिस ने जब कंपनी से कार के बारे में पड़ताल की तो इसकी जानकारी मिली। इधर पुलिस के कहने पर ओला कंपनी से पुलिस को कार की फोटा उपलब्ध कराई गई। कार के पिछले शीशे पर मेरठ के कार डीलर (तानिया मोटर्स) का स्टीकर लगा था। उसी स्टीकर के आधार पर पुलिस मेरठ पहुंच गई। पुलिस ने शोरूम से पिछले एक साल की वैगनआर कार   खरीदने वालों की डिटेल मांगी। इधर ओला कंपनी से डिटेल निकलवाकर उसको मैच कराया गया। पुलिस के सामने अनुज मोतला गुर्जर का नाम सामने आया। इसके दादरी निवासी अनुज मोतला व उसके भाई का हाथ है।

मुठभेड़ के बाद बुधवार रात को भी मांगी फिरौती

यहां की थी बदमाशों ने पार्टी
मेरठ में बुधवार शाम पुलिस व बदमाशों की बीच हुई मुठभेड़ की जानकारी शायद बाकी बदमाशों को नहीं थी। यही वजह थी कि बुधवार रात 12.00 बजे फरार बदमाशों ने पांच करोड़ रुपये फिरौती की कॉल दुबारा कर दी। टेक्निकल सर्विलांस के आधार पर पुलिस को पता चला कि आरोपियों ने फिरौती की कॉल मुजफ्फरनगर के खतौली से की थी। फौरन पुलिस की एक टीम को खतौली भेजा गया। पुलिस की कई टीमें अभी फरार बदमाशों की तलाश में पश्चिम उत्तर-प्रदेश के अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी कर रही है। 

एरोप्लेन मोड पर वीडियो बना 25-30 किमी दूर से भेजते थे आरोपी...
पुलिस की गिरफ्त से बचने के लिए बदमाशों ने श्रीकांत को चार-पांच अलग-अलग जगहों पर रखा। टेक्निकल सर्विलांस से बचने के लिए बदमाश उस स्थान पर मोबाइल का इस्तेमाल नहीं करते थे, जहां पर श्रीकांत को रखा जाता था। श्रीकांत के ही दोनों मोबाइल से एरोप्लेन मोड पर उसका वीडियो बनाकर 25-30 किलोमीटर दूर जाकर ओला को वीडियो भेजा जाता था। बाद में मोबाइल को तुरंत स्विच ऑफ कर दिया जाता था। वीडियो में डॉ. श्रीकांत से जबरन फिरौती की रकम देने की गुजारिश करते हुए दिखाया जाता था। श्रीकांत ओला के अधिकारियों से पांच करोड़ मांगते हुए रोता दिखता था। बदमाशों ने श्रीकांत के मोबाइल से करीब 30 कॉल करने के अलावा एसएमएस और व्हाटसऐप मैसेज किए। उसकी ही व्हाट्सऐप से ओला को वीडियो भेजे गए।

फिरौती की कॉल के लिए आरोपी करते थे प्रैक्टिस

अपहरण मामले को लेकर हुआ था जमकर हंगामा
पुलिस को पता चला है कि आरोपियों ने ओला कैब से फिरौती वसूलने के लिए चार-पांच माह पूर्व ही योजना बना ली थी। इसके लिए उन्होंने पहले ही खूब प्रैक्टिस की थी। किस अंदाज में कॉल करना है, कैसे बात करनी है। इसके लिए बकायदा रिहर्सल की थी।  भारी आवाज बनाकर श्रीकांत को जान से मारने की धमकी दी जाती थी। श्रीकांत को अगवा करने के साथ  ही उसी दिन तड़के 4.30 बजे फिरौती की रकम मांग  ली गई। 

बदमाश डॉ. श्रीकांत को लगाते थे नशे के इंजेक्शन
बदमाशों के चंगुल से मुक्त होने के बाद डॉ. श्रीकांत सदमे में हैं। बृहस्पतिवार को पुलिस की प्रेस कांफ्रेंस के दौरान श्रीकांत रोने भी लगे। श्रीकांत ने बताया कि अगवा करने के बाद बदमाश उन्हें मारते-पीटते हुए अपने साथ ले गए। बदमाश खुद को अलकायदा का आतंकी बताते थे। डराने के लिए बदमाशों ने उनकी एक बार हाथ की नस काटने का प्रयास किया था, जिसके बाद वह बुरी तरह डर गए थे। शुरू में बदमाशों ने उन्हें जहां रखा था, वह बहुत अंधेरी कोठरी थी। छोटी-छोटी बातों पर उन्हें मारा-पीटा जाता था। खाना भी उन्हें एक ही टाइम दिया जाता था। कई बार पानी मांगने पर उनके बाल खींचे जाते थे। बेसुध रखने के लिए एक बदमाश उसे नशे के इंजेक्शन लगाते थे। 

गिरफ्त में ही बीता डॉ. का जन्मदिन
श्रीकांत का जन्मदिन 10 जुलाई बदमाशों की गिरफ्त में बीता। यही वजह है कि बुधवार को पुलिस ने जब श्रीकांत को मुक्त कराया तो देर रात डीसीपी ओमवीर सिंह बिश्नोई की मौजूदगी में श्रीकांत से केक कटवाकर उसका जन्मदिन मनाया गया। इधर, दिल्ली में मेट्रो अस्पताल में उनके साथी डॉक्टरों ने शुक्रवार को श्रीकांत का जन्मदिन मनाने की खूब तैयारी की हुई हैं। श्रीकांत के दोस्त डॉक्टर राकेश ने बताया कि चीन से एमबीबीएस करने के बाद ढाई साल पूर्व ही श्रीकांत दिल्ली आए थे।

डॉक्टर अपहरण मामले में मुख्य आरोपी कोसों दूर

डॉक्टर श्रीकांत और आरोपी की फाइल फोटो
दिल्ली के डॉक्टर श्रीकांत के अपहरण मामले के मुख्य आरोपी पुलिस से अभी कोसो दूर है। उनके परिजन व रिश्तेदारों को पुलिस ने उठा रखा है। बुधवार रातभर आरोपियों की तलाश में दिल्ली और मेरठ पुलिस खतौली में दबिश देती रही। लेकिन उनका सुराग नहीं लगा। डॉक्टर की बरामदगी की बाद भी बुधवार रात दोनों भाइयों ने ओला कंपनी में फिरौती के लिए कॉल की। जिनकी लोकेशन खतौली में बताई गई। दिल्ली और मेरठ पुलिस की संयुक्त टीम ने रातभर खतौली में आरोपियों की तलाश में दबिश दी, लेकिन बाद में उनका फोन स्वीच ऑफ हो गया। पुलिस की पकड़ से अभी मुख्य आरोपी दोनों भाई अनुज व सुशील और उनके दो साथी गौरव और विवेक उर्फ सौरभ कोसो दूर है। उनकी तलाश में अभी दिल्ली पुलिस की एक टीम मेरठ में डेरा डाले हुई है।

रिश्तेदार, कारोबारी दोस्तों ने बनाया जरायम का गठबंधन
पकडे़ गए बदमाश और मास्टर माइंड सभी लोग एक दूसरे रिश्तेदार और कारोबारी दोस्त हैं। बुधवार को मुठभेड़ के बाद पकड़े गए रामा गार्डन निवासी प्रमोद और मकान मालिक सोहनवीर दोनों पेशे से प्रापर्टी का काम करते हैं। दोनों अच्छे परिचित भी हैं। इस केस के मास्टर माइंड माने जा रहे दादरी के अनुज को ट्रेस कर लिया था। पुलिस को दो दिन पूर्व रामा गार्डन निवासी प्रमोद का पता चला। दिल्ली पुलिस दो दिन पूर्व ही प्रमोद के घर पहुंच गई थी लेकिन वह हाथ नहीं आया। मोहल्ले वालों ने बताया कि उसके मकान के बाहर खड़ी एक सेंट्रो कार की भी पुलिस ने तलाशी ली थी। पुलिस ने कार ले जाने की कोशिश की लेकिन उसका लॉक नहीं खुला। पुलिस ने कार के टायर पंचर कर दिए।

अमीर बनने के लिए जरायम में रखा कदम 

मौके पर खून के निशान मिले
मकान मालिक सोहनवीर भी प्रोपर्टी का काम करता है इसी वजह से प्रमोद और सोहनवीर  दोनों एक दूसरे के परिचित हैं। सोहनवीर मूल रूप से मुजफ्फरनगर जिले का रहने वाला है। इसलिए पुलिस का मानना है कि सोहनवीर पकडे़ गए मुजफ्फरनगर के कैल गांव के अमित को भी पहले से ही जानता है । पुलिस ये भी मान रही है कि मास्टर माइंड और पकडे़ गए सभी आरोपी दूर की रिश्तेदारी और जान पहचान की वजह से एक दूसरे को जानते हैं। चिकित्सक के अपहरण के बाद अनुज आदि ने चिकित्सक को रखने के लिए एक दूसरे से संपर्क किया और मदद मांगी। चूंकि सोहनवीर की पत्नी और बच्चे घर में नही रहते थे इस वजह से उसने डॉक्टर को अपने घर में रखवाया। 

दादरी गांव के अनुज ओर उसका भाई सुशील आज अपहरण जैसे मामले में मास्टरमाइंड बन गए। दोनों भाई जरायम की दुनिया में नाम और पैसा कमाना चाहते है। इनके साथ में गांव का ही दोस्त गौरव शर्मा ओर विवेक उर्फ मोदी को भी अपने साथ कर लिया। चारों दोस्त डॉक्टर श्रीकांत गौड़ का अपहरण कर लिया। चारों दोस्त अपहरण के मामले में मास्टर माइंड है। अभी तक इन चारों के खिलाफ स्थानीय थानों में किसी भी तरह के अपराधिक मामले दर्ज नहीं है।
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अच्छा था व्यवहार, हमें क्या पता ऐसे काम करेंगे

कमान में खून पड़ा मिला
अनुज और सुशील ने दिल्ली में दो गाड़ी बनाकर ओले कैब में शुरुआत की थी। गांव में जब वह आते थे और अपने यार दोस्तों में बैठते थे, यह जरुर कहते थे कि एक दिन देखना हम अमीर जरूर बनेंगे, गांव वाले देखते रह जाएंगे। ग्रामीणों को भी नहीं पता था कि वह अमीर बनने की चाह रखते है और इस चाह को बढ़ाने के लिए वह किसी का अपहरण भी कर सकते है। इस अपहरण केस के मास्टर माइंड के रुप में चर्चाओं में आए दादरी गांव के सुशील और उसका भाई अनुज दोनों शादी शुदा हैं। पुलिस का मानना है कि जल्द अमीर बनने की वजह से उन्होंने ये कदम उठाया। सुशील के दोस्त दोस्त गौरव की छवि भी गांव में अच्छी नहीं है। विवेक उर्फ मोदी अभी अविवाहित है। चारों अभी पकड़ से दूर है। 
 
अनुज गुर्जर और सुशील दोनों ही गांव में अच्छे व्यवहार के साथ रहते थे। जब गांव में पहली बार दबिश आयी और अनुज के परिजनों को उठाकर लेकर गई, तब जाकर पता चला कि दोनों भाइयों ने गौरव शर्मा के साथ मिलकर अपराध किया है। डॉ श्रीकांत गौड़ को पूरी प्लानिंग के तहत इन लोगों ने दादरी और पीरपुर गांव के जंगल में एक टयूबवैल पर भी रखा है। ग्रामीणों की माने अपने एक दोस्त की टयूबवैल पर देर रात तक दो गाड़ी खड़ी हुई थी, जब मामला खुला तो पता चला कि डॉक्टर को वहां पर रखा गया था।

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