मवाना (मेरठ)। गांव राफन के निकट स्थित सिंघल पेपर मिल में बुधवार को दोपहर के समय क्रेन की सिलिंग (कुंडा) टूटकर फिटर के सिर पर गिरने से गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे इलाज के लिए मेरठ ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। शाम 4:00 बजे परिजन मिल के गेट पर धरने पर बैठ गए। राज्यमंत्री दिनेश खटीक ने देर शाम 27 लाख रुपये फैक्टरी की ओर से आर्थिक मदद तथा 12 हजार रुपये प्रतिमाह पत्नी को पेंशन तथा 3 लाख रुपये राज्यमंत्री ने अपने पास से देने का आश्वासन दिया। इसके बाद परिजन शांत हुए।
हस्तिनापुर की शकुंतला काॅलोनी निवासी अभिषेक ने बताया कि वह और उसका चाचा अरुणपाल (35) पुत्र रामचंद्र राफन के निकट स्थित सिंघल पेपर मिल में नौकरी करते हैं। अरुणपाल यहां बीते कई साल से फिटर के रूप में काम कर रहे थे। दोपहर के समय सूचना मिली कि चाचा के साथ हादसा हो गया। वह मौके पर पहुंचा तो मिल वाले उसके चाचा को इलाज के लिए ले जा चुके थे। जानकारी करने पर पता चला कि सुबह करीब 11:00 बजे के आसपास अरुणपाल रोल चढ़ा रहे थे। इसी दौरान क्रेन की सिलिंग (कुंडा) टूटकर सिर पर गिरने से वह गंभीर रूप से घायल हो गए। मिल स्टाफ घायल अरुणपाल को पहले मेरठ प्राइवेट अस्पताल, बाद में मेरठ मेडिकल लेकर गए, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
परिजनों को हादसे में मौत की जानकारी हुई तो वह शाम 4:00 बजे सिंघल पेपर मिल गेट पर पहुंचे तथा धरने पर बैठ गए। मामला राज्यमंत्री दिनेश खटीक तक पहुंचा तो उन्होंने वार्ता कराई। राज्यमंत्री ने रात करीब 8:00 बजे आश्वासन दिया कि मिल की ओर से 27 लाख रुपये, 12 हजार रुपये मृतक की पत्नी मोनिका को पेंशन तथा तीन लाख रुपये राज्यमंत्री दिनेश खटीक अपने पास से मदद करेंगे। इसके बाद परिजन लौट गए। वहीं, मिल के प्रशासनिक मैनेजर विनोद कुमार ने बताया कि हादसे में अरुणपाल की मौत हुई है। परिवार की आर्थिक मदद की जाएगी।
अधिकारियों के नहीं पहुंचने पर जताई नाराजगी
घटना की जानकारी होने पर ब्लाॅक प्रमुख के पति डाॅ. योगेश प्रधान भी मौके पर पहुंचे तथा परिजनों से जानकारी की। उन्होंने नाराजगी व्यक्त की कि दोपहर की घटना के बाद भी कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। जिले के आला अधिकारियों को इस बात की जानकारी दी। इसके बाद तहसीलदार रणविजय सिंह मौके पर पहुंचे। तहसीलदार ने बताया कि उन्हें अभी हादसे की जानकारी मिली है। वहीं, उन्होंने तहसीलदार से कहा कि लोगों की शिकायत है कि फैक्टरी से प्रदूषण फैल रहा है, इसकी जांच कराकर कार्रवाई की जाए।
मृतक की चार बेटियां व एक बेटा
अरुणपाल की चार बेटियां तथा एक बेटा है। बड़ी बेटी खुशी (14), अंतिम (12), अनन्या (10), प्रिया (8) तथा 11 माह का बेटा है। परिवार के पालन पोषण का एकमात्र साधन यही नौकरी थी। लेकिन अरुणपाल की मौत के साथ ही यह सहारा भी चला गया।