पहले उधार और अब दान की कीटनाशक से हो रहा छिड़काव
मेरठ। अधूरी तैयारी के साथ नगर निगम कोरोना जैसी महामारी से लड़ रहा है। निगम के पास शहर को सैनिटाइज करने के लिए पर्याप्त कीटनाशक उपलब्ध नहीं था। जिस कारण लॉकडाउन के बाद निगम ने जल निगम से उधार में सोडियम हाइपोक्लोराइट सॉल्यूशन लिया। उसके बाद बरेली की एक कंपनी से उधार में ही कीटनाशक मंगवाया। उधार में कीटनाशक लेने में भी नगर निगम का कुछ समय बर्बाद हो गया। अगर सभी संसाधन पहले से ही निगम के पास होते तो छिड़काव आदि का कार्य पहले से कराया जा सकता था।
अब नगर निगम प्रशासन ने राजस्थान कोटा की एक फ़र्टिलाइजर कंपनी से संपर्क साधकर 26000 लीटर सोडियम हाइपोक्लोराइट सॉल्यूशन लेने का निर्णय लिया है। बताया जा रहा है कि फ़र्टिलाइजर कंपनी ने नगर निगम को निशुल्क कीटनाशक दवाई देने पर हामी भर ली है। हालांकि इसकी एवज में नगर निगम कोटा से मेरठ तक दवाई लाने पर आने वाला ट्रांसपोर्ट का खर्च कंपनी को देगा। फर्टिलाइजर कंपनी से मिलने वाले कीटनाशक दवाई से जहां नगर निगम जल निगम से ली गई 17000 लीटर सोडियम हाइपोक्लोराइट सॉल्यूशन की उधारी चुकाएगा, वही निगम के स्टोर में कम से कम आगामी दो माह के लिए दवा का स्टॉक भी रखेगा। बता दें कि महानगर में वायरस का संक्रमण न फैले इसकी रोकथाम के लिए शहर में लगातार 40 दिन से छिड़काव किया जा रहा है। विशेषज्ञों की मानें तो कीटाणु फंगस वायरस आदि को मारने व बढ़ने से रोकने में सोडियम हाइपोक्लोराइट सॉल्यूशन और ब्लीचिंग पाउडर ही कारगर है। नगर निगम ने बरेली की डीसीएम श्रीराम कंपनी से 5000 लीटर सोडियम हाई क्लोराइड सॉल्यूशन लिया है। स्टोर में 7000 लीटर दवाई का स्टॉक है। साथ ही 200 बोरे ब्लीचिंग पाउडर के हैं। 26000 लीटर सोडियम हाइपोक्लोराइट सॉल्यूशन राजस्थान कोटा की डीसीएम श्रीराम फर्टिलाइजर कंपनी से तीन-चार दिन के अंदर निशुल्क प्राप्त हो जाएगा। इससे शहर को दो से तीन माह तक सैनिटाइज किया जा सकेगा।
20 लाख जनसंख्या की जिम्मेदारी
महानगर की जनसंख्या 20 लाख है। नगर निगम ने शहर को 90 वार्ड में बांटा है। महानगर के प्रत्येक वार्ड की सफाई और सैनिटाइजिंग पथ प्रकाश पानी सड़क निर्माण आधी जन सुविधा देने की जिम्मेदारी नगर निगम की है। जिसमें जिला पूर्ति प्राथमिकता पर है। कोरोना वायरस से उत्पन्न हुए संकट में नगर निगम की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। फायर ब्रिगेड और निगम की टीम शहर में छिड़काव का कार्य कर रही हैं।
ब्लीचिंग पाउडर से फायदा
ब्लीचिंग पाउडर को पानी में एक निर्धारित मात्रा के साथ मिलाकर छिड़काव किया जाता है। ब्लीचिंग पाउडर का कार्य भी कीटाणु वायरस फंगस को खत्म करना है। लेकिन ब्लीचिंग पाउडर की मारक क्षमता सोडियम हाइपोक्लोराइट सॉल्यूशन से कुछ कम होती है। इसका प्रयोग पानी में घोल बनाकर छिड़काव करने के साथ-साथ कुछ नमी वाले स्थानों पर सूखा पाउडर डालकर भी किया जाता है। ताकि कीटाणु जन्म ही न ले सके।
सोडियम हाइपोक्लोराइट सॉल्यूशन
नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. गजेंद्र कुमार के मुताबिक सोडियम हाइपोक्लोराइट सोल्यूशन कीटाणु फंगस वायरस बैक्टीरिया नाशक है। जो वातावरण को इन्फेक्शन रहित करता है। जिस प्रकार कोरोना वायरस के कारण कहीं पर भी चिपके होने की बात कही जा रही है ऐसे वायरस के कणों को खत्म करने मैं सोडियम हाइपोक्लोराइट सॉल्यूशन महत्वपूर्ण है। इसीलिए पानी में मिलाकर इसका छिड़काव किया जा रहा है। एक निर्धारित समय तक यह काम करता है।
यह है इसके साइड इफेक्ट
चिकित्सकों के अनुसार सोडियम हाइपोक्लोराइट सॉल्यूशन वायरस नाशक है, ऐसी स्थिति में इससे कुछ पेड़ पौधों की पत्तियां मुरझा सकती हैं। साथ ही दीवार आदि पर भी इस के धब्बे कुछ समय के लिए दिखाई दे सकते हैं। अगर कोई कर्मचारी टंकी को अपनी कमर पर लादकर इस कीटनाशक के घोल का छिड़काव करता है तो उसकी कमर पर भी इसका असर आ सकता है। क्योंकि यह एक एसिड है, जिसका असर होता है।
पर्याप्त संसाधन हैं निगम के पास
नगर निगम ने 600 बोरे ब्लीचिंग पाउडर की खरीद के अलावा कोई पैसा खर्च नहीं किया है। कुछ उधार तो कुछ निशुल्क कीटनाशक लिया जा रहा है। जब पर्याप्त संसाधन निशुल्क मिल रहे हैं तो बेकार में पैसा खर्च नहीं किया जा सकता है। हमारे पास इतना कीटनाशक है कि शहर को अगले दो से तीन माह तक सैनिटाइज किया जा सकता है। अगर जरूरत पड़ी तो और संसाधन भी जुटाए जाएंगे। - डॉ. अरविंद कुमार चौरसिया नगर आयुक्त