मीट शॉप को लेकर शासन स्तर से सख्त नियम जारी किए गए हैं। हर हाल में इन नियमों का पालन करना अनिवार्य कर दिया गया है। खास बात यह है कि मीट शॉप पर काम करने वाले कारोबारी और कर्मचारियों को अब अपना मेडिकल टेस्ट कराना होगा। शारीरिक या मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति किसी भी हाल में मीट शॉप पर काम नहीं कर पाएगा। शॉप में किसी भी पशु और पक्षी का कटान नहीं किया जाएगा।
शासन स्तर से 17 नए नियम जारी किए गए हैं। सभी मीट कारोबारियों को अब हर हाल में इन नियमों को पूरा करना होगा। इसके साथ ही तीन पुराने नियमों का भी पालन करना होगा। खाद्य एवं औषधि सुरक्षा विभाग (एफडीए) ने स्पष्ट कर दिया है कि हर हाल में मीट की शुद्धता को सुनिश्चित किया जाएगा। अगर कोई मीट व्यापारी नियमों का पालन नहीं करता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही मीट कारोबारी अब लोहे के नहीं बल्कि स्टील के हथियार का ही इस्तेमाल करेंगे।
ये हैं नियम
- धार्मिक स्थल की परिधि से 50 और मुख्य गेट से 100 मीटर दूर संचालित होगी मीट शॉप।
- सब्जी की दुकानों के आसपास भी मीट शॉप नहीं होगी।
- दुकान के अंदर किसी भी अवस्था में कटान नहीं होगा।
- दुकान के मालिक और कर्मचारी को हेल्थ सर्टिफिकेट लेना होगा।
- शहरी क्षेत्र में सर्किल अफसर नगर निगम से एनओसी मिलने के बाद ही फूड सेफ्टी विभाग लाइसेंस देगा।
- ग्रामीण क्षेत्र में ग्राम पंचायत, सर्किल अफसर से एनओसी मिलने के बाद लाइसेंस जारी होगा।
- मीट की क्वालिटी को पशु चिकित्सक से प्रमाणित कराना होगा।
- बीमार और गर्भवती जानवर के कटान की अनुमति नहीं होगी।
- हर छह महीने में दुकान के अंदर करानी होगी सफेदी।
- चाकू और दूसरे धारदार हथियार स्टील के इस्तेमाल होंगे।
- दुकानदार को कूड़े के निस्तारण की व्यवस्था करनी होगी।
- बूचड़खानों से खरीदे जाने वाले मीट का हिसाब रखना होगा।
- बूचड़खाने से इंसुलेटेड फ्रीजर वाली गाड़ियों का इस्तेमाल करना होगा।
- मीट को फ्रिज के अंदर रखकर बेचा जाएगा।
- हर दुकान पर गीजर रखना अनिवार्य होगा।
- दुकान के बाहर पर्दे और गहरे रंग के ग्लास की व्यवस्था करनी होगी।
- दुकान पूरी तरह पक्की होनी चाहिए।
- दीवारों पर पांच फीट तक टायल्स अनिवार्य रूप से लगी हो।
- दुकान की जमीन पर भी टाइल्स लगी होनी चाहिए।
- मानक पूरे न होने पर या उल्लंघन होने पर एफडीए को लाइसेंस रद्द करने का अधिकार होगा।