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भाजपा आरएसएस के इशारे पर चलाई गई गोली : राम गोविंद चौधरी

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भाजपा-आरएसएस के इशारे पर पुलिस ने चलाई सीधी गोली: राम गोविंद चौधरी
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मेरठ। विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी ने 20 दिसंबर को हुए उपद्रव में मारे गए पांच लोगों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये केचेक दिए। इस दौरान उन्होंने भाजपा और आरएसएस पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सीएए के खिलाफ चल रहे आंदोलन को बदनाम करने केलिए सरकार के इशारे पर पुलिसवालों ने खुद आगजनी-तोड़फोड़ की और इल्जाम विरोध करने वालों पर लगाया। बाद में भाजपा-आरएसएस के इशारे पर पुलिस ने सीधी गोलियां चलाईं, जिनमें विरोध करने वालों की मौत हुई।
उन्होंने कहा कि सीएए के खिलाफ आंदोलन आजादी की तीसरी लड़ाई है। सपा की सरकार आई तो आंदोलनकारियों को पेंशन भी दे सकती है। उन्हें संविधान रक्षक सम्मान भी देगी। सपा केराष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव मृतकों के परिजनों के हर तरह से साथ है, अगर जरूरत पड़ेगी तो सपा और मदद करेगी। उन्होंने मामले की जांच हाईकोर्ट की मौजूदा जज से कराए जाने की मांग की। कहा कि सीबीआई और एसआईटी पर विश्वास नहीं रह गया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में सभी ने देखा जो लोग मारपीट कर रहे थे। 50 हजार का जूता पहने हुआ व्यक्ति पुलिसवाला नहीं हो सकता। एक पुलिस वाला गाड़ी में तेल छिड़क रहा था और दूसरा पुलिसवाला आग लगा रहा था। लखनऊ में भी ऐसा ही किया, जब सपा का आंदोलन समाप्त हो गया तो मुंह पर कपड़ा बांधकर कुछ लोग आए और गाड़ी-बाइकों में आग लगाई। पुलिस मृतकों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं दे रही है। इससे साफ है कि दाल में काला है। पुलिस की गोली से लोग मरे हैं। देश में जो आंदोलन चल पड़ा है ये किसी से नहीं रुकने वाला। जेएनयू में हुए हमले के सवाल पर उन्होंने कहा कि जेएनयू को बदनाम किया जा रहा है।
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मुद्दों से भटकाना चाहती है सरकार
राम गोविंद चौधरी ने कहा कि भ्रष्टाचार, घोटाले, किसानों की परेशानी, रोजगार के मुददें से ध्यान भटकाने के लिए केंद्र और यूपी सरकार इस तरह के कार्य कर रही है। कभी सीएए की बात करती है तो कभी एनपीआर और और एनआरसी की। इससे दुनिया में देश की बदनामी हो रही है। देश की गद्दी पर तानाशाह बैठ गए हैं। भारतीय जनता पार्टी का अंत होगा। एक लोकतांत्रिक सरकार आएगी।
कहां से नागरिकता दिखाएंगे घूमंतू जाति के लोग
उन्होंने कहा कि एनआरसी अगर लागू हुआ तो सपेरे, नट और घुमंतू जाति के लोग अपनी नागरिकता कैसे साबित करेंगे। कोई नया तानाशाह आए और ये कहे कि आर्य बाहर से आए थे तो क्या होगा। कोर्ट भी कह चुका है कि यूपी में जंगलराज है। इससे बड़ी बात और क्या हो सकती है।
कांग्रेस और भाजपा में कोई अंतर नहीं है
कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी के मेरठ आने के सवाल पर उन्होंने कहा कि चोरी से किसी के घर में आना सही नहीं है। हम भी आ सकते थे, लेकिन हमने प्रशासन से अनुमति ली, तब आए। इमरजेंसी में कांग्रेस सरकार ने लाठियां बजवाई अब वह कैसे आंदोलन का समर्थन कर रही हैं। कांग्रेस और भाजपा में कोई अंतर नहीं है।
ये सपाई थे प्रतिनिधिमंडल में
बवाल में मारे गए लोगों के परिजनों को चेक देने के लिए दो जगह शहर विधायक रफीक अंसारी के आवास और सपा के पूर्व महानगर अध्यक्ष आदिल चौधरी के आवास पर कार्यक्रम रखे गए थे। सपा का नौ सदस्य प्रतिनिधिमंडल में यूपी विधानसभा में नेता विरोधी दल राम गोविंद चौधरी, सांसद जावेद अली खां, पूर्व विधायक शाहिद मंजूर, एमएलसी जितेंद्र यादव, विधायक रफीक अंसारी, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व्यापार सभा गोपाल अग्रवाल, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष छात्र सभा अतुल प्रधान, सपा केराष्ट्रीय सचिव आकिल मुर्तजा और पूर्व विधायक गुलाम मोहम्मद शामिल थे।
इन मृतकों केपरिजनों को दिए चेक
जहीर पुत्र मुंशी निवासी रशीदनगर जादू वाली गली
आसिफ पुत्र जग्गी निवासी अहमद नगर गली नंबर 10
मोहसिन पुत्र अहसान निवासी गुलजार ए इब्राहिम
आसिफ पुत्र शाहिद निवासी घंटे वाली गली, भूमिया का पुल
अलीम पुत्र हबीब निवासी अहमद नगर गली नंबर 9
परिजन नहीं मिलने के कारण नहीं दिया एक चेक
मृतकों में सालिम पुत्र दिलशाद निवासी ताला फैक्ट्री का भी चेक था, लेकिन उसके परिजनों के नहीं मिलने के कारण चेक नहीं दिया जा सका। उसके परिजनों के मिलने पर उन्हें यह चेक दिया जाएगा। जिन पांच परिवारों को चेक दिए गए हैं, उनमें जिनकी पत्नी और मां दोनों हैं, उन्हें दोनों को ढाई-ढाई लाख के चेक दिए गए हैं।
शाहिद मंजूर और गोपाल अग्रवाल में कहासुनी
सपाइयों में आपसी कलह सोमवार को चेक दिए जाने के दौरान भी सामने आई। शहर विधायक रफीक अंसारी के आवास पर नाश्ते केदौरान सपा नेता गोपाल अग्रवाल नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी को एक ज्ञापन देने लगे कि बाबर चौहान आदि को बवाल से पहले पुलिस ने गिरफ्तार किया था। इस पर शाहिद मंजूर नाराज हो गए। उन्होंने कहा कि बाबर की गिरफ्तारी रंगदारी के मामले में हुई थी। यह ऐसा मौका नहीं है, जिसमें इस तरह के ज्ञापन दिए जाएं। दोनों में कहासुनी होते देख शहर विधायक ने बीच-बचाव कराया।
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...जब रफीक अंसारी का करने लगे विरोध
पूर्व महानगर अध्यक्ष आदिल चौधरी के आवास पर चेक दिए जाने के दौरान एक युवक आया और शहर विधायक रफीक अंसारी पर भड़कने लगा। उसके साथ कुछ और लोग भी थे। उसका कहना था कि जिस दिन घटना हुई, उस दिन रफीक अंसारी कहां थे। उस दिन मदद क्यों नहीं की। काफी देर गहमागहमी रही। इस पर राम गोविंद चौधरी ने कहा कि विधायक लखनऊ में थे। तब जाकर मामला शांत हुआ। इससे पहले मृतकों को दफनाने के दौरान भी कुछ लोगों ने विधायक का विरोध किया था।
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