दस हजार से ज्यादा बना चुके तमंचे
पुलिस की पूछताछ में दोनों आरोपियों ने बताया कि वह दस हजार से ज्यादा तमंचे बना चुके है। एक कारीगर तीन तमंचे रोजाना आसानी से बना देता है। फैक्टरी में तीन-चार लोग तमंचे बनाने का काम करते हैं। जबकि कई लोग तमंचे सप्लाई के लिए लगे हैं। देहात इलाके में तमंचे की डिमांड ज्यादा आती है। चुनाव के दौरान तमंचे और बंदूक की डिमांड बढ़ जाती है।
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तमंचे बनाने वालों का गढ़ है राधना
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक तमंचे-पिस्टल और बंदूक बनाने में किठौर का राधना गांव बदनाम है। पुलिस ने शिकंजा कसा तो राधना के कारीगर लिसाड़ीगेट सहित देहात में कई अलग-अलग जगह पर जाकर तमंचे बनाने का काम करते है। तमंचों को सप्लाई करने वालों का पता लगाने के लिए पुलिस टीम लगी है। तमाम प्रयास के बावजूद भी राधना के कारीगरों का नेटवर्क पुलिस नहीं तोड़ पाई।