आतिशबाजी के दौरान आग लगने से पांच साल के बच्चे की मौत
- फोटो : Demo Pic
दिवाली पर आतिशबाजी को लेकर विशेष उत्साह होता है। मेरठ में पिछले साल सुप्रीम कोर्ट की पाबंदी के बाद जिला प्रशासन ने सारे लाइसेंस निरस्त व निलंबित कर दिए थे। इस बार सुप्रीम कोर्ट ने विशेष शर्तों के साथ आतिशबाजी चलाने की छूट दी है। लेकिन अभी तक भी जिला प्रशासन से इस तरफ कोई निर्देश न मिलने पर जिले में करोड़ों की आतिशबाजी का स्टॉक अवैध है।
जिले में करीब 30 लोगों के पास स्थायी लाइसेंस हैं। जिन्हें अधिकतम पांच किलो विस्फोटक सामान के साथ आतिशबाजी बनाने की अनुमति है। ये लोग अपने पास आतिशबाजी का स्टॉक करते हैं। दिवाली पर कुछ लोगों को शर्तें पूरी करने पर थोक विक्रेता का लाइसेंस दिया जाता है, तो बड़ी संख्या में व्यापारी फुटकर बिक्री का लाइसेंस लेते हैं।
पिछले साल कार्रवाई
पिछले साल प्रशासन ने सभी 30 स्थायी लाइसेंस निलंबित कर दिए थे, जिन्हें अब तक बहाल नहीं किया है। इन 30 लोगों के अतिरिक्त पचास से ज्यादा ने थोक में आतिशबाजी का स्टॉक इस उम्मीद पर किया हुआ है कि वह लाइसेंस प्राप्त कर लेंगे। जिले में आतिशबाजी का 25 करोड़ का स्टॉक जमा है। क्योंकि सस्ते खरीदने के लालच में व्यापारी दिवाली से स्टॉक जमा कर लेते हैं।
निर्देश जारी नहीं
आतिशबाजी का लाइसेंस कलक्ट्रेट के शस्त्र अनुभाग से जारी होता है। लेकिन अभी तक शस्त्र अनुभाग को इस संबंध में कोई दिशा निर्देश जारी नहीं हुए हैं। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार पिछले साल मंडलायुक्त ने सख्ती के साथ रोक लगाने का आदेश दिया था। लेकिन मंडलायुक्त कार्यालय से भी इस संबंध में अभी कोई दिशा निर्देश नहीं मिला है।
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