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जांच रिपोर्ट में उलझी गुत्थी, नहीं लिखा मुकदमा

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मेरठ। हरिओम आनंद प्रकरण की गुत्थी एसपी सिटी की जांच रिपोर्ट से भी नहीं सुलझी। बताया जाता है कि मानसी आनंद जिस पत्र के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कराना चाहती थीं, उसमें तकनीकी पेंच फंस गया है। अभियोजन की तरफ से सलाह दी गई है कि मृतक को वादी नहीं बनाया जा सकता है। एफआईआर के लिए आनंद परिवार को नए सिरे से तहरीर देनी होगी। अभी तक मुकदमा भी दर्ज नहीं हुआ है। वहीं, शनिवार को मानसी आनंद की तबियत बिगड़ गई। उन्हें आनंद अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
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आनंद अस्पताल के एमडी हरिओम आनंद ने 27 जून को आत्महत्या कर ली थी। उनकी बेटी मानसी आनंद ने सुभारती ट्रस्ट के चेयरमैन और आनंद हॉस्पिटल के शेयरधारकों पर उत्पीड़न का आरोप लगाकर एसएसपी को शिकायती पत्र दिया था। 26 जून का एक शिकायती पत्र हरिओम आनंद द्वारा भी लिखा जाना बताकर पुलिस को दिया गया था। मामला हाई प्रोफाइल होने के चलते एसएसपी ने सीधे मुकदमा दर्ज न कराते हुए एसपी सिटी को जांच सौंपी थी। एसपी सिटी ने तीन दिन पहले ही एसएसपी को जांच रिपोर्ट सौंपी थी। लेकिन संस्तुति के बावजूद रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई। बड़ा सवाल उठता है कि आखिर इस मामले में पुलिस कहां फेल हो रही है।
25 दिन की जांच रिपोर्ट में कहां फंसा पेच
जांच अधिकारी एसपी सिटी ने 25 दिन तक हरिओम आनंद प्रकरण की बारीकी से जांच पड़ताल की। सुभारती ट्रस्ट के चेयरमैन और आनंद हॉस्पिटल से जुड़े शेयर धारकों समेत 15 लोगों के बयान और साक्ष्य लिए गए। सभी के बयानों की समीक्षा करने के साथ ही एक्सपर्ट से भी राय ली। मुकदमा संस्तुति के आदेश एसएसपी द्वारा कर दिए गए, इसके बावजूद विधिक राय में मुकदमा दर्ज करने में बड़ा पेच फंस गया। बताया जा रहा है कि विधिक राय के अनुसार मृतक हरिओम आनंद को मुकदमे का वादी नहीं बनाया जा सकता। आनंद परिवार के किसी सदस्य को वादी बनाना होगा।
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पीड़ित परिवार पर दबाव बनाने की कोशिश
मृतक हरिओम आनंद के उस पत्र पर मुकदमा दर्ज नहीं हो सकता है, जो उन्होंने आत्महत्या से एक दिन पहले लिखा था। इसको लेकर पुलिस पर हरिओम आनंद के परिवार पर दबाव बनाने की कोशिश के आरोप लग रहे हैं। मानसी आनंद के अधिवक्ता राम कुमार शर्मा का कहना है कि आनंद हॉस्पिटल में शनिवार को सीओ सिविल लाइन संजीव देशवाल व एसओ मेडिकल कुलबीर सिंह मानसी आनंद से मिलने गए थे। मानसी की तबीयत खराब थी। जिसके चलते उन्होंने पुलिस से मिलने से इंकार कर दिया। सवाल उठता है कि अब आनंद परिवार पर पुलिस किस बात का दबाव बना रही है। मानसी आनंद पहले ही पिता की मौत के मामले में एसएसपी को शिकायती पत्र दे चुकी हैं।
पीड़ित परिवार में गुस्सा, मुख्यमंत्री से मिलेंगे
मानसी आनंद के अधिवक्ता का कहना कि पीड़ित परिवार में पुलिस के प्रति गुस्सा है। उनका आरोप कि पुलिस उनका उत्पीड़न कर रही है। जिसके चलते मानसी आनंद की शनिवार को फिर तबीयत बिगड़ गई। वह आनंद हॉस्पिटल में भर्ती है। परिवार को जान का खतरा बना हुआ है। 25 दिन की एसपी सिटी ने जांच में कोई भी निष्कर्ष नहीं निकाला। जिन लोगों पर आरोप लगाए गए हैं, वह बड़े लोग हैं। उनके प्रभाव में पुलिस की जांच चल रही है। पीड़ित परिवार इंसाफ के लिए पुलिस अधिकारियों के चक्कर काट रहा है। एक माह होने को है, लेकिन पुलिस ने इस मामले में कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं की। जबकि हरिओम आनंद की खुदकुशी के मामले में पीड़ित परिवार की तहरीर पर शुरुआत में ही केस दर्ज होना चाहिए। उसके बाद जांच में जो भी दोषी होते, उनके खिलाफ कार्रवाई हो जाती। इंसाफ न मिलने पर अब आनंद परिवार मुख्यमंत्री और डीजीपी से मिलेगा।
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