आग से पोल खुलती है... फिर सब खामोश
20 अगस्त को परतापुर में पारस और गणपति केमिकल फैक्टरी में नकली पेट्रोल-डीजल बनने की पोल खुली। दस लोग जेल गए। उसके बाद कई तेल कारोबारियों के अवैध धंधों की पोल खुली। मेजर ध्यानचंदनगर में केमिकल के अवैध गोदाम में भीषण आग लगी। जांच के लिये पांच विभागों की टीम गठित हुई, इसके बावजूद कोई नतीजा नहीं निकला। तीन सप्ताह बीतने के बावजूद भी कोई कार्रवाई करने को तैयार नहीं है।
उसके बाद बागडियान मोहल्ले में केमिकल को नाले में बहाया गया। जिसमें आग लगने से भी पोल खुली थी। इसकी भी कोई जांच पड़ताल नहीं की गई। अब लिसाड़ीगेट के खुशहालनगर में नकली पेट्रोल डीजल की दुकान में आग लगी है। सवाल उठता है कि अब इसकी जांच कैसे होगी। नीचे से ऊपर तक ऐसी सेटिंग है कि आग से पोल खुलने के बाद कार्रवाई के नाम पर सब खामोश हो जाते हैं।
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