- दर्द ने कदम थामे तो आस्था ने फिर बढ़ाया हौसला, कोई मरहम लगवा रहा तो कोई कांवड़ से दे रहा समाज को संदेश
शरद गुप्ता
दौराला (मेरठ)। पैरों के तलवे छालों से छलनी हैं... हर कदम पर दर्द उठता है। कई दिनों से पैदल चल रहे शिवभक्तों की चाल अब पहले जैसी तेज नहीं रही। कहीं कोई सड़क किनारे बैठकर पैरों पर पट्टी बंधवा रहा है तो कहीं कोई साथी दर्द से कराहते हुए पैर दबा रहा है। कुछ मिनट आराम के बाद फिर कंधे पर कांवड़ उठती है और थके होंठों से आवाज निकलती है- बोल बम। दर्द पीछे छूट जाता है और कदम मंजिल की ओर बढ़ जाते हैं। हरिद्वार से घर और फिर शिवालय तक पहुंचने की खुशी अब छालों से बड़ी हो चुकी है।
दादरी से मोदीपुरम तक 50 से अधिक सेवा शिविर शिवभक्तों के इन दर्द भरे कदमों को सहारा दे रहे हैं। सीएचसी दौराला के अलावा दादरी से डौरली तक पांच चिकित्सा शिविर लगे हैं। दौराला थाने के सामने लावड़ निवासी जितेंद्र सैनी के शिविर में ही रोज करीब 500 कांवड़िये पैरों के छालों का उपचार और दर्द निवारक मलहम लगवाने पहुंच रहे हैं। जितेंद्र सैनी के अनुसार, शिविर में उपचार के लिए आने वाले कांवड़ियों में 80 प्रतिशत के पैरों में छाले, जबकि करीब 40 प्रतिशत दर्द और मांसपेशियों में खिंचाव से परेशान हैं।
दोनों पैरों में छाले, नहीं रुकी दीपक की कांवड़
गाजियाबाद निवासी दीपक के दोनों पैरों में छाले पड़ गए। दर्द इतना कि चलना मुश्किल था। दौराला थाने के सामने शिविर में पट्टी कराई, मलहम लगवाया और कुछ देर आराम किया। फिर कांवड़ कंधे पर रखी और धीमे कदमों से चल पड़ा। चेहरे पर दर्द था, लेकिन मंजिल करीब होने की खुशी उससे बड़ी थी। दिल्ली निवासी अनिल के पैरों में भी पट्टी बंधी थी। दर्द के बावजूद वह आगे बढ़ते रहे। बोले, शिव ने अपने द्वार बुलाया था, अब इस पड़ाव को भी वही पार कराएंगे। यही भरोसा हजारों कांवड़ियों के थके कदमों को फिर गति दे रहा है।
किसी के कदमों में दर्द, किसी की कांवड़ में संदेश
दिल्ली के ओखला निवासी भोले शिवा और गौरव की कांवड़ आस्था के साथ सामाजिक संदेश भी दे रही है। उनकी कांवड़ पर भगवान शिव के साथ संत प्रेमानंद महाराज और गायक स्व. गुलशन कुमार की तस्वीरें लगी हैं। कांवड़ पर लिखा है ‘जो संसार के सभी सुखों का त्याग कर चुका हो, उसे नशे का आदी कैसे कहा जा सकता है।’ शिवा और गौरव कहते हैं कि आदियोगी भगवान शिव को नशेड़ी कहना उचित नहीं है। उनका उद्देश्य भगवान शिव के वास्तविक स्वरूप को लेकर समाज में बनी भ्रांतियों को दूर करना है। उनका कहना है कि नशे से दूर रहना चाहिए और अपने नशे को सही ठहराने के लिए भगवान शिव का सहारा नहीं लेना चाहिए।
मरहम पैरों पर और दिल में अटूट विश्वास
अनोखी कांवड़ को देखने के लिए राहगीर रुक रहे हैं। कोई तस्वीर ले रहा है तो कोई संदेश पढ़कर आगे बढ़ रहा है। उधर, चिकित्सा शिविरों में छालों पर मरहम लग रहा है। किसी के पैरों का दर्द आस्था से हार रहा है तो किसी की कांवड़ समाज को सोच बदलने का संदेश दे रही है। कांवड़ मार्ग की यह तस्वीर बताती हैं कि यह यात्रा सिर्फ गंगाजल को मंदिर तक पहुंचाने की नहीं है। कहीं दर्द सहने की परीक्षा है, कहीं विश्वास की ताकत और कहीं समाज को बेहतर रास्ता दिखाने का संकल्प। मंजिल नजदीक है, इसलिए हर थका कदम भी कह रहा है- बोल बम।
दौराला - हाईवे पर 108 एंबुलेंस में कांवड़ियों का किया जा रहा उपचार। स्रोत : स्वयं
दौराला - हाईवे पर 108 एंबुलेंस में कांवड़ियों का किया जा रहा उपचार। स्रोत : स्वयं
दौराला - हाईवे पर 108 एंबुलेंस में कांवड़ियों का किया जा रहा उपचार। स्रोत : स्वयं