होली के त्योहार से ठीक एक दिन पहले ही खाद्य एवं औषधि सुरक्षा विभाग (एफडीए) द्वारा सैंपलिंग अभियान पर ब्रेक लगाने से कई सवाल खड़े हो गए हैं। अफसरों ने इसका कारण पूर्व में भरे गए सैंपल जांच के लिए भेजने में व्यस्तता बताया, लेकिन उसका यह दावा गले नहीं उतर रहा है।
शासन के थे निर्देश
शासन ने त्योहार के मद्देनजर मिलावट की शिकायतों पर एफडीए को जोरदार अभियान छेड़ने के निर्देश दिए थे। इसके लिए मेरठ को इस बार आठ खाद्य सुरक्षा अधिकारी अलग से दिए गए थे। सैंपलिंग की बात करें तो बीते पांच दिनों के अभियान में किसी भी दिन 10 सैंपल भी नहीं भरे गए। इस दौरान दूध व उससे बने प्रोडक्ट की सैंपलिंग सबसे ज्यादा की जानी थी, लेकिन सोमवार को छोड़कर बाकी दिन इक्का-दुक्का ही सैंपल भरे गए।
अपने ही दावे से पलटे
खाद्य विभाग की तरफ से कहा जा रहा था कि मंगलवार को व्यापक पैमाने पर सैंपलिंग की जानी है, क्योंकि कुछ लोगों की शिकायतें मिली हैं, लेकिन पूरे दिन कोई सैंपल नहीं भरा गया। होली बुधवार को है, जिसको देखते हुए एक दिन पहले बड़े स्तर पर अभियान चलाया जाना भी चाहिए था, लेकिन कोई टीम बाजार में नहीं उतरी। वैसे भी पिछले पांच दिनों में इतने भी सैंपल नहीं भरे गए, जिन्हें भेजने में पूरे खाद्य विभाग को जुटना पड़े। सच्चाई यह भी है कि खाद्य विभाग सैंपलिंग के बीच में ही डिस्पेच करने का काम निपटाता रहा है। खाद्य विभाग के अधिकारी भी बीच में दलील देते रहे हैं कि अगर सैंपल को भेजने में देरी होती है तो काफी दबाव आता है। ऐसे में जल्द से जल्द सैंपल को जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिया जाता है।
देहात का इलाका रहा अछूता
शहर में बड़ी संख्या में ग्रामीण इलाकों से दूध व उससे तैयार होने वाले खाद्य पदार्थ लाए जाते हैं, जिनमें होली के चलते मिलावट की गुंजाइश बढ़ जाती है। ऐसे में त्योहारी सीजन में दूध व उससे बने पदार्थों की सैंपलिंग सबसे ज्यादा होती है। लेकिन उस बार ग्रामीण क्षेत्र में सोमवार को ही सैंपलिंग की गई, वो भी सरधना व दौराला ब्लॉक के दो गांवों से तीन सैंपल भरकर कार्रवाई को खत्म कर दिया गया। ऐसे में कहीं ना कहीं खाद्य विभाग की नीयत पर ही सवाल खड़ा होता है।
हमें अभी तक भरे गए सैंपलों को भेजना भी है, इसलिए कार्रवाई को रोकना पड़ा है। अब अगर कोई व्यक्ति मिलावट की शिकायत करता है तो विभागीय टीम सैंपलिंग करेगी।
- जेपी सिंह, खाद्य सुरक्षा अधिकारी