‘बेटे के सपनों को पूरा करने की रहेगी कोशिश’
बीटेक करने के बाद ही बेटे सिद्धांत झुनझुनवाला की नौकरी लग गई। उसको समाज सेवा का इतना शौक था कि नौकरी लगते ही तीन अनाथ बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाना शुरू कर दिया। कुछ दिन पहले जॉब छोड़ने के बाद अब वह ऑनलाइन शॉपिंग बिजनेस कर रहा था। उसे पशु-पक्षियों से भी बहुत प्यार था। रोज कुत्तों को खाना खिलाता था। फादर्स डे कभी वैसे नहीं मनाया, लेकिन वो विश जरूर करता था। मेरी सभी बातें मानता था। अब वो मेरा सहारा बन गया था। छोटी बहन हिमांशी का आईआईटी जोधपुर में एडमिशन हुआ तो उसने उसका जाने के लिए हौसला बढ़ाया। मुझसे कहता था कि पापा आप चिंता मत करो। मैं काम करने लगा हूं। उसने जिन बच्चों को गोद लिया, कोशिश रहेगी, उनको आगे पढ़ाएं। - पवन झुनझुनवाला, शिव सरोवर, गढ़ रोड
‘पिछले साल फ्रेम में फोटो जड़वाकर दिया था’
मेरे दोनों इंजीनियर बेटे रजा हुसैन जैदी और शुजा हुसैन जैदी एक साथ छोड़कर चले गए। मैं रिटायर हुआ तो कहते थे कि पापा अब आपको परेशान होने की कोई जरूरत नहीं है। हम कमाने लगे हैं। फादर्स डे पर हर बार विश करते थे। पिछली बार तो बेटों ने अपने साथ खिंचाई फोटो फ्रेम में जड़वाकर दी थी। कहा था पापा हमारी तरफ से फादर्स डे पर ये आपका गिफ्ट है। दोनों मेरा सहारा थे। कहते थे आपने बहुत काम कर लिया अब हम हैं। कोरोना ने खुशियां छीन लीं। अब फादर्स डे पर उनकी सिर्फ यादें हैं। किसी और परिवार को ऊपर वाला ये दिन न दिखाए। रजा की सिर्फ चार महीने की बेटी है। छोटा बेटा मुर्तजा भी आज के दिन उनको बहुत याद कर रहा है। - वकार हुसैन जैदी, शास्त्री नगर सेक्टर-10
‘दोनों साथ लाए थे खुशियां, साथ ले गए’
मेरे दोनों जुड़वां बेटे जोफ्रेड वर्गीज ग्रेगरी और राल्फ्रेड जॉर्ज ग्रेगरी दुनिया से चले गए। फादर्स डे पर हर बार विश करते थे। इस बार ये दिन बहुत भारी लग रहा है। उनकी यादें कितनी हैं, इस बारे में बता नहीं सकता हूं। दोनों को पढ़ा-लिखाकर कामयाब बनाया, नौकरी लगी तो दिल को सुकून मिला कि अब मुझे सहारा मिलेगा। लेकिन कोरोना ने खुशियां छीन लीं। कुछ भी कहने को शब्द नहीं हैं। ऐसा दिन भगवान किसी को न दिखाए। एक साथ आए थे, एक साथ चले गए। जितनी खुशियां थीं सब बिखर गईं। दोनों कोरिया और जर्मनी जाना चाहते थे, लेकिन उनकी ये इच्छा पूरी नहीं हो पाई, इसका उम्रभर मलाल रहेगा। - ग्रेगरी राफेल, शिक्षक, कैंट