देश में कैंसर के मरीजों की बढ़ती संख्या चिकित्सा जगत के लिए बड़ी चुनौती है। हर साल 10 लाख कैंसर के नए केस सामने आ रहे हैं। गरीब देशों के कैंसर कहे जाने वाले सर्वाइकल के अलावा दूसरे कैंसर ने उछाल मारा है। प्रोस्टेट कैंसर पुरुषों की बीमारी में नंबर दो पर आ गया है। गर्भाशय के कैंसर के बढ़ते केस चौंका रहे हैं। समय पर पता चल जाए तो इन सबका इलाज संभव है। आधुनिक तकनीक ने राह आसान की है। धूम्रपान, खानपान और शराब कैंसर के मुख्य कारणों में से एक है। मोटापा कैंसर की वजह बन रहा है। खासतौर पर गर्भाशय के कैंसर में मोटापा मुख्य वजह के रूप में सामने आ रहा है। यह सब बातें रविवार को एक्सपर्ट डॉक्टर्स ने कैंसर पर आईएमए हॉल में आयोजित नेशनल कांफ्रेंस मेें कहीं।
मेरठ कैंसर हॉस्पिटल और सेठ हीरालाल चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा आयोजित नौवीं वार्षिक कैंसर कांफ्रेंस ऑनोकोन 2017 का टॉपिक व्हॉट्स न्यू इन जेनीटोरनिरी कैंसर्स फोकस ऑन किडनी प्रोस्टेट एंड एंडोमीटिरियल कैंसर था। इसमें 200 से अधिक कैंसर स्पेशलिस्ट, सर्जन और गायनेकोलॉजिस्ट ने भाग लिया। उद्घाटन डॉ. वीबी भटनागर, टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल मुंबई के डॉ. गणेश बख्शी, फोर्टिस हॉस्पिटल दिल्ली के डॉ. अनिल मनधानी और आरआर हॉस्पिटल के डॉ. ब्रिगेडियर भूपेश गोयल ने दीप जलाकर किया।
मेरठ कैंसर हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. उमंग मित्थल ने कहा कि दुनिया में दो करोड़ लोगों को कैंसर है। 90 लाख लोग बढ़ते प्रदूषण, बदलती जीवन शैली, मसालेदार खानपान, शराब और धूम्रपान के सेवन की वजह से मरीज बने। 40 लाख मरीजों की कैंसर से मौत होती है। भारत में करीब 25 लाख व्यक्ति कैंसर से पीड़ित हैं। हर साल 10 लाख मरीज कैंसर के नए सामने आते हैं। गुर्दे, गदूद और गर्भाश्य के कैंसर भारत में सबसे तेजी से बढ़ने वाले हैं। पश्चिमी सभ्यता का खानपान इसकी मुख्य वजहों में से एक है।
पुरुषों में बढ़ रहा प्रोस्टेट कैंसर
टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल मुंबई से आए डॉ. गणेश बख्शी का कहना है प्रोस्टेट (गदूद) कैंसर पुरुषों की बीमारी में नंबर दो पर आ गया है। पहले यह चार और पांच पर हुआ करता था। मतलब पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर बढ़ रहा है। पहले औसत उम्र 55 साल के आसपास होती थी। यह भी बढ़ी है। प्रोस्टेट कैंसर बढ़ती उम्र की बीमारी कही जाती है। इसके होने की वजहों में पारिवारिक, खानपान में बदलाव, पेस्टीसाइड पॉल्यूशन और मोटापा आदि है। विकसित देशों में प्रोस्टेट कैंसर के केस में 90 प्रतिशत में पहली स्टेज पर पता चल जाता है। पेशाब में खून जाने को गंभीरता से लें।
डाइट और व्यायाम पर दें ध्यान
फोर्टिस हॉस्पिटल के डॉ. अनिल मनदानी ने कहा कि शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने पर कैंसर होता है। किडनी के कैंसर में भी यह बात लागू होती है। डाइट, स्मोकिंग और व्यायाम अहम पहलू हैं। अच्छा खाएंगे और व्यायाम करेंगे तो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी होगी।
उम्मीद संस्था करेगी काउंसिलिंग
कैंसर के मरीज और उनके परिजनों की काउंसिलिंग करने के लिए उम्मीद संस्था ने पहल की है। समय पर जांच भी जरूरी है। डॉ. आभा आनंद, वंदना शर्मा, और ममता दीक्षित उम्मीद संस्था के माध्यम से कैंसर की काउंसिलिंग करेंगी। डॉक्टरों के माध्यम से वह मरीज तक जाएंगे। पहले शहर और फिर बाहर काम किया जाएगा।