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फर्श पर बनाए जा रहे चौलाई के लड्डू  

Wed, 27 Sep 2017 10:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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खाद्य सुरक्षा प्रशासन की टीम ने मंगलवार को दिल्ली रोड स्थित दो कारखानों में छापेमारी कर गुड़, चौलाई के लड्डू, मटर, चने की दाल और नमकीन के सैंपल लिए। इनमें मिलावट का संदेह है। इन्हें जांच के लिए लखनऊ प्रयोगशाला भेजा जाएगा। जांच रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। जांच रिपोर्ट आने तक एक कारखाना बंद करा दिया गया है। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी सर्वेश मिश्रा ने बताया कि खाद्य सुरक्षा प्रशासन की टीम ने दोपहर में माधवपुरम में विनोद कुमार के गोदाम में छापेमारी की। जहां से गुड़, चौलाई के लड्डू और नमकीन के नमूने लिए गए। उन्होंने बताया कि गुड़ के चौलाई के लड्डू जहां बनाए जा रहे थे, वहां गंदगी थी। फर्श पर गुड़ और चौलाई का दाना पड़ा हुआ था और कारीगर लड्डू बना रहे थे। इनके सैंपल लेकर कारखाने के बंद कराने के निर्देश दिए गए। उन्होंने बताया कि इन लड्डुओं का लोग व्रत में भी इस्तेमाल करते हैं। लेकिन वहां काफी गंदगी थी।
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इसके बाद दिल्ली रोड स्थित कंचन बंसल के कारखाने में छापेमारी की गई, जहां से चने की दाल और मटर की दाल के सैंपल लिए गए। उन्होंने बताया कि इन दालों में मिलावट की आशंका रहती है। हालांकि जांच के बाद पता चल पाएगा कि मिलावट है या नहीं। इस कार्रवाई के दौरान अभिहित अधिकारी अर्चना धीरान, खाद्य सुरक्षा अधिकारी अनिल गंगवार, दर्पण कुमार, वाईडी आर्य और वैभव शर्मा मौजूद रहे।

 
सावधान! मिलावट की मार, कहीं कर न दे बीमार 
 त्योहारी सीजन शुरू हो चुका है। ऐसे में खाद्य पदार्थों में मिलावट का अंदेशा ज्यादा रहता है। खासतौर पर दूध और दूध से बने पदार्थों पर ज्यादा जोर रहता है। गर्मी में दूध की आपूर्ति घट जाती है तो मांग पूरी करने के लिए दूध में मिलावट बढ़ जाती है।
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इस संबंध में मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी सर्वेश मिश्रा ने बताया कि छापेमारी के साथ-साथ खाद्य सुरक्षा प्रशासन लोगों को जागरूक भी कर रहा है। दूसरी तरफ, सीएमओ डॉ. राजकुमार ने बताया कि अखाद्य पदार्थों एवं रंगों की मिलावट से बनी मिठाइयां स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती हैं। रंगों की मिलावट से गंभीर रोग हो सकते हैं। यहां तक की किडनी फेल हो सकती है। उल्टी-दस्त और पेट संबंधी बीमारी हो सकती है।

ऐसे करें मिलावटी मिठाई की पहचान
मिठाई को गर्म पानी में डालें। इसके बाद आयोडीन लें और इन मिठाई वाले कटोरे में में डाल दें। अगर मिठाई घुलकर रंग बदलती है तो मिठाई में मिलावट है। अगर रंग वैसे का वैसा ही रहता है तो मिठाई ठीक है।

घर पर जांचे दूध-दही और मावे की मिलावट
दूध में पानी : दूध की एक बूंद को चिकने या चमकदार तिरछी सतह पर डालने से शुद्ध दूध की बूंद धीरे-धीरे आगे बढ़कर पीछे एक सफेद निशान छोड़कर बहती है, जबकि पानी मिला दूध तेजी से बिना निशान छोड़े बहेगा।
दूध में स्टार्च : टिंक्चर आयोडीन की कुछ बूंदे मिलाने पर स्टार्च युक्त दूध में नीला रंग आ जाता है। टिंक्चर आयोडीन दवा दुकान से आसानी से मिल जाती है।
दूध में यूरिया : दूध में यूरिया की जांच के लिए एक परखनली में थोड़ा दूध लेकर उसमें आधा चम्मच सोयाबीन या अरहर पाउडर मिला लें। फिर इसे पांच मिनट के लिए रख दें, इसके बाद इसमें एक लाल लिटमस पेपर डुबाने पर पेपर का रंग लाल से नीला हो जाए तो दूध में यूरिया की मिलावट मानी जाती है। लाल लिटमस पेपर स्टेशनरी की दुकान से मिल जाता है।
दूध में वनस्पति : तीन से पांच मिली दूध एक परखनली में लेकर उसमें दस बूंद हाइड्रोक्लोरिक अम्ल एवं एक चम्मच चीनी मिलाने पर पांच मिनट बाद लाल रंग दिखाई देने लगे तो दूध में वनस्पति की मिलावट होती है।
दही : दही में मिलावट हो तो एक चम्मच दही परखनली में लेकर 10 बूंद हाइड्रोक्लोरिक अम्ल डालकर हिलाएं, अगर इसका रंग लाल हो जाता है तो दही में वनस्पति की मिलावट होती है।
मावा : शुद्ध मावा कठोर होता है। मावा में आयोडीन सॉल्यूशन डालें, अगर मावा में मिलावट होगी तो उसका रंग बैंगनी हो जाएगा।

हाइड्रोक्लोरिक अम्ल : एक प्रमुख अकार्बनिक अमल है। हाइड्रोजन क्लोराइड गैस के जलीय विलयन को ही हाइड्रोक्लोरिक अमल कहते हैं। यह कैमिस्ट के यहां मिल जाता है।
मेटानिल येलो : यह बेहद जहरीला रंग है, जो खाद्य पदार्थों को चमकीला रंग देने के लिए प्रयोग किया जाता है।
 
बीमार होने का है खतरा
सीएमओ डॉ. राजकुमार ने बताया कि गंदगी में बन रहे खाद्य पदार्थ खाने से बीमार होने का खतरा बना रहता है। सबसे ज्यादा पेट दर्द, उल्टी, दस्त और बदहजमी आदि शिकायतें हो सकती हैं।
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