कोरोना महामारी के दौरान अर्थव्यवस्था को हमारे गांवों ने संभाला। जिले में जब सब कुछ थम गया था, तब जिले के 681 गांव के किसानों की मेहनत रंग लाई। उनकी वजह से ही घरों में कैद लोगों को भरपेट भोजन के लिए अन्न मिल पाया। आज देश में खाद्यान्न के भंडार भरे हैं। अर्थव्यवस्था को मजबूत करते हुए जिले के 80 प्रतिशत किसानों ने कोरोना महामारी के दौरान लोन का भुगतान अप्रैल माह की शुरुआत में ही कर दिया।
कारोबारियों के साथ अन्य लोगों को व्यापार व अन्य समस्याओं के चलते मोरेटोरियम का लाभ लेना पड़ा। जिले के किसानों ने कोरोना काल में कृषि संबंधी सभी ऋणों का भुगतान किया। वर्ष 2019-2020 मार्च तक शहर की विभिन्न 32 बैंकों की 463 शाखाओं ने लगभग 1.37 लाख किसानों को 1711.27 करोड़ का ऋण दिया।
एलडीएम कार्यालय से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, 80 प्रतिशत किसानों ने करीब 1369 करोड़ के ऋण का भुगतान कर दिया है। अप्रैल से जून के माध्य शहर के बैंकों ने लगभग 86 हजार किसानों को 735 करोड़ का ऋण बांटा।
लॉकडाउन के बाद अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए अब बैंक भी कृषि क्षेत्र पर खास ध्यान दे रहे हैं। हाउसिंग लोन और अन्य लोन देने में जहां बैंकों ने हाथ खींचे। वहीं, कृषि संबंधी ऋण खुलकर बांटे जा रहे हैं।
कृषि ऋण पर दिया जा रहा ध्यान
जिले में 32 बैंकों की 463 शाखाओं के द्वारा लगातार कृषि को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न प्रकार के ऋण दिए जा रहे हैं। लॉकडाउन पीरियड में 86 हजार से ज्यादा किसानों को ऋण दिया गया है। कोरोना काल में 80 प्रतिशत किसानों ने लोन का भुगतान किया है।
-संजय कुमार, एलडीएम, मेरठ।
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