मेरठ में लंबी लड़ाई, आंदोलन और लगातार किए गए किसानों के संघर्ष के बाद तीन योजनाओं के किसानों को दिए जाने वाले प्रतिकर का आकलन लगभग तैयार है। हालांकि इस हिसाब में एमडीए अधिकारियों के पसीने छूट गए पर अब किसानों को दिये जाने वाले 150 करोड़ रुपये का हिसाब तैयार है। जिन किसानों का मुआवजा कुल ढाई लाख से कम बन रहा है तो उन्हें तो नगद ही देना होगा। बाकी के लिए भूखंड देने के लिए फाइल को अलग-अलग अंतिम रूप दिया जा रहा है।
यह है पूरा प्रकरण
1987 में शताब्दीनगर, लोहियानगर, गंगानगर तथा वेदव्यासपुरी योजना लांच की गई थी। किसानों की जमीन का अधिग्रहण किया गया। सभी किसानों को मुआवजा भी लगभग एक समान दिया गया। वर्ष 2011 में शताब्दीनगर के किसानों ने आंदोलन किया तो 690 रुपये प्रति वर्ग मीटर की हिसाब से उन्हें प्रतिकर दे दिया गया। इस पर बाकी तीनों योजनाओं के किसानों ने भी आंदोलन का बिगुल बजा दिया। दो साल पहले बोर्ड बैठक में उनका भी प्रतिकर इसी आधार पर तय हो गया पर शर्त यह लगी कि इन किसानों को प्रतिकर के बदले भूखंड दिए जाएंगे। तब से अब तक यह समझौता लागू ही नहीं हुआ था। अब मंडलायुक्त डॉ. प्रभात कुमार ने इसे सख्ती से लागू कराने को कहा तो एमडीए ने हिसाब किताब लगभग तैयार कर लिया है।