दौराला। गन्ना किसानों को आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल खेती से जोड़ने के उद्देश्य से आईसीएआर-राष्ट्रीय समेकित नाशीजीव प्रबंधन अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली की ओर से मंडौरा गांव में किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया। गन्ना आधारित आईपीएम मॉडल गांव विकास परियोजना के तहत आयोजित गोष्ठी की अध्यक्षता संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. पीएन मीना ने की।
वैज्ञानिकों ने किसानों को गन्ने की फसल में लगने वाले प्रमुख कीट एवं रोगों की पहचान और उनके प्रबंधन की आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ट्राइकोडर्मा और बैसिलस प्रजातियों के कंसोर्टिया का प्रयोग करने से गन्ने की जड़ों और तनों को मिट्टी व बीज जनित रोगों से बचाने में मदद मिलती है। नीम तेल, फेरोमोन ट्रैप और ट्राईकोकार्ड के माध्यम से पर्यावरण-अनुकूल तरीके से कीट नियंत्रण के बारे में भी किसानों को बताया गया। किसानों को तकनीकों का खेतों में प्रयोग करने के लिए ट्राईकोकार्ड और गुणवत्तापूर्ण नीम तेल समेत जैविक उत्पाद वितरित किए गए।
कार्यक्रम प्रगतिशील किसान वेदवर्त आर्य के आवास पर हुआ। आर्य ने किसानों को ड्रम में जैविक एजेंटों का गुणन करने और उनके प्रयोग की विधि समझाई। वैज्ञानिकों ने कहा कि मंडौरा को आईपीएम मॉडल गांव के रूप में विकसित करने से किसानों में वैज्ञानिक खेती के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।