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Meerut News: किसान की सब्जी सस्ती और व्यापारी की महंगी, पिस रही जनता

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मेरठ..कंवलजीत..सब्जी के महंगे होते दाम===खबर राजकुमार सैनी......संवाद
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मेरठ। कड़कड़ाती सर्दी और तपती गर्मी सहकर खेतों में सब्जियां उगाने वाला किसान बाजार की बेरुखी से बेजार है। विडंबना यह है कि जिस सब्जी को किसान औने-पौने दाम पर बेचने को मजबूर है, वही सब्जी शहर की गलियों, ठेलों और मोहल्लों में दोगुने-तिगुने दामों पर बिक रही है। किसान की जेब खाली है, जबकि उपभोक्ता महंगाई से परेशान। बीच का पूरा लाभ केवल व्यापारी उठा रहा है। यही दर्द इस समय मेरठ की सब्जी मंडियों में साफ झलक रहा है।
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यह पूरी व्यवस्था किसान की मजबूरी और उपभोक्ता की बेबसी दोनों को उजागर करती है। मेहनत किसान करता है लेकिन लाभ किसी और की जेब में चला जाता है। बाजार की यही विडंबना आज सबसे बड़ा दर्द बनकर उभर रही है। रविवार को अमर उजाला टीम ने नवीन और लोहियानगर मंडी के साथ शहर के कई इलाकों में सब्जियों के भाव का मुआयना किया। तस्वीर चौंकाने वाली है। बैंगलोर से आया टमाटर मंडी में 30–35 रुपये किलो था, लेकिन फुटकर में 60–80 रुपये में बेचा जा रहा था। पंजाब की मटर मंडी में 55 रुपये और शहर में 100 रुपये तक। यही हाल अदरक, हरी मिर्च और शिमला मिर्च का भी है। यानी मजदूरी, खाद-बीज और सिंचाई खर्च का बोझ उठाने वाले किसान को मामूली दाम, जबकि उपभोक्ता को महंगी सब्जी का बोझ।
सबसे अधिक मार आलू किसानों पर पड़ी है। पंजाब से नए आलू की आवक बढ़ गई है। स्थानीय आलू चाहे पुराना हो या चिपसोना सब औने–पौने दाम पर बिक रहे हैं। आलू सब्जियों का राजा कहलाता है। इसके बावजूद भी पंजाब से आने वाला नया आलू और स्थानीय पुराना 3797 और चिपसोना भी उसी रेट में मिल रहा है। शादी-विवाह के मौसम में अन्य सब्जियों की मांग बढ़ने से उनके दाम बढ़े हैं, पर आलू की भरपूर आवक ने किसानों की कमर तोड़ दी है।
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सब्जी थोक फुटकर
टमाटर 30-35 60-80 रु.
हरी मटर 50-55 80-100 रु.
अदरक 50-55 80-120 रु .
हरी मिर्च 50-55 80-100 रु.
शिमला मिर्च 50-55 80-110 रु.
नया आलू 8- 10 15-20 रु.
पुराना आलू चिपसोना10-12 - 18-22 रु.



नोट- सब्जियों के ये प्रति किलो सब्जी के रेट हैं जो मंडी और शहर में फुटकर विक्रेताओं से लिए गए हैं।
“बाहर से आने वाली सब्जियां महंगी हैं। शादियों के कारण उनकी खपत बढ़ी है। इसलिए दाम चढ़े हुए हैं लेकिन आलू इतना अधिक स्टोर में भरा है कि किसान जितना लगा रहा है, उतना निकल भी नहीं पा रहा। उसे भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।”
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- अशोक प्रधान, थोक सब्जी विक्रेता, नवीन मंडी।
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