जानीखुर्द (मेरठ)। स्केप गंगनहर से हिंडन नदी में अधिक पानी छोड़े जाने से बागपत और गाजियाबाद जिले के किसानों की करीब एक हजार बीघा जमीन पर खड़ी फसल खराब हो गई। इससे गुस्साए किसानों ने बुधवार को भोला झाल पर कई घंटे तक जमकर हंगामा और प्रदर्शन किया।
भोला झाल से गंगनहर से निकली स्केप गंगनहर हिंडन नदी में मेरठ बागपत जिले की सीमा पर गांव डालूहेड़ा में मिलती है। एक सप्ताह पूर्व अचानक स्केप गंगनहर का जलस्तर ज्यादा बढ़ने से हिंडन नदी का जलस्तर भी काफी अधिक बढ़ गया। इस कारण हिंडन नदी के किनारे स्थित खेत भी जलमग्न हो गए। अचानक जलस्तर बढ़ने से नदी किनारे बसे बागपत और गाजियाबाद जिले के हरियाखेड़ा, सर्फाबाद, गढ़ी कलंजरी, पूरनपुर नवादा, चमरावल और मुकरी आदि गांवों के खेतों में करीब एक हजार बीघा फसल खराब हो गई। इससे किसानों को काफी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
किसानों की शिकायत पर एसडीएम बागपत व राजस्व विभाग की टीम ने मौका मुआयना कर सिंचाई विभाग के एक्सईन को हिंडन में पानी कम करने के दिशा निर्देश दिए थे। पानी कम न होने पर बुधवार को भारतीय किसान यूनियन किसान सभा के नेतृत्व में पीड़ित किसान भोला झाल स्थित सिंचाई विभाग कार्यालय पहुंचे। किसानों ने हिंडन नदी में जलस्तर कम करने और फसल को हुए नुकसान का मुआवजा देने की मांग के लिए धरना-प्रदर्शन किया।
किसानों ने बताया कि करीब एक हजार बीघा जमीन पर खेड़ी आलू, मूली, पालक, गेहूं, सरसों, खीरा, बैंगन, लौकी, टमाटर आदि की फसल की बुवाई कर रखी है। हिंडन में कई दिन से जल स्तर बढ़ने से हजारों बीघा खड़ी फसल डूब गई। किसानों ने बताया कि जमीन को ठेके पर लेकर लाखों रुपये लगाकर फसल की बुवाई की थी।
शाम होने पर किसानों ने जल्द मुआवजा और पानी कम न किए जाने पर अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन की चेतावनी देते हुए धरना समाप्त किया। यूनियन किसान सभा के प्रदेश प्रवक्ता अमित जाखड़, प्रदेश अध्यक्ष युवा विनीत त्यागी, प्रदेश अध्यक्ष देवदर्थ धामा, मंडल उपाध्यक्ष मोहसिन आदि रहे।