सरधना। गांव दबथुवा में प्रस्तावित चकबंदी प्रक्रिया का विरोध करते हुए तहसील में धरने के बाद ज्ञा
- 562 खातों के सापेक्ष 437 लोगों की सहमति दर्शाने पर उठाए सवाल, नायब तहसीलदार को ज्ञापन देकर कार्रवाई की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
सरधना। तहसील क्षेत्र के गांव दबथुवा में चकबंदी प्रक्रिया को लेकर किसानों का विरोध तेज हो गया है। चकबंदी अधिकारियों पर शासन को भेजी गई रिपोर्ट में सहमति के तथ्यों को भ्रामक तरीके से प्रस्तुत करने का आरोप है। बुधवार को किसानों ने तहसील परिसर में धरना दिया और रागिनी के माध्यम से अपनी पीड़ा उठाई।
उपजिलाधिकारी के धरनास्थल पर नहीं पहुंचने से किसानों ने नाराजगी जताई। बाद में नायब तहसीलदार राहुल सिंह को ज्ञापन सौंपा गया। उन्होंने किसानों की मांगों पर संज्ञान लेकर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया। किसानों के अनुसार, बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी ने 12 अक्तूबर को चकबंदी आयुक्त, लखनऊ को रिपोर्ट भेजी थी।
इस रिपोर्ट में गांव के कुल 562 खातों के सापेक्ष 437 व्यक्तियों के चकबंदी कराने की सहमति का उल्लेख था। किसानों ने इस विवरण पर सवाल उठाया है। उनका आरोप है कि रिपोर्ट में वास्तविक सहखातेदारों की संख्या को नजरअंदाज किया गया। ग्रामीणों का कहना है कि आधार वर्ष की खतौनी के अनुसार गांव में करीब 3800 सहखातेदार हैं। किसानों ने आख्या रिपोर्ट की जांच कराकर तथ्यों की निष्पक्ष पड़ताल और उचित कार्रवाई की मांग की।
भाजपा नेता अनिल दबथुवा के नेतृत्व में किसानों ने चेतावनी दी कि यदि 28 नवंबर तक चकबंदी निरस्त करने के संबंध में किसानों के हित में निर्णय नहीं लिया गया तो गांव के 90 फीसदी खातेदार और सहखातेदार लखनऊ पहुंचेंगे। वह परिवारों सहित ट्रैक्टरों से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने अपनी समस्याएं रखेंगे। धरने में अनिल चौधरी दबथुवा, ओमबीर प्रधान, तेजवीर प्रधान, कैप्टन अरविंद, कृष्णपाल प्रधान सहित कई किसान मौजूद रहे।