जानकारी के अभाव में लाभदायक कीटों को मार रहा है किसान
बहसूमा। स्वामी कल्याण देव के कृषि वैज्ञानिक डॉ. शिव मालियान ने बताया कि फसलों को लेकर किसान चिंतित तो है, परंतु जानकारी के अभाव में यह अपने दोस्तों को ही मार रहा है। किसान खेती में सहायक कीटों को दवा का छिड़काव कर मार रहा है। इसका सीधा असर फसल उत्पादन व मनुष्य के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।
बहसूमा हस्तिनापुर में कई जगहों पर कीटनाशकों के प्रयोग पर अध्ययन व विश्लेषण करने के बाद उन्होंने यह बात कही। उन्होंने कहा कि कीटनाशकों के गलत व जानकारी के अभाव में अधिक दोहन से किसानों को हानि उठानी पड़ रही है। स्वामी कल्याण देव के कृषि वैज्ञानिक डॉ. शिव मालियान ने बताया कि खेतों में हानिकारक और लाभकारी दोनों तरह के कीट होते हैं। यदि खेत में हानिकारक कीटों की संख्या लाभकारी कीट से काफी अधिक हो तो तभी किसानों को खेतों में कीटनाशक का प्रयोग करना चाहिए। यदि हानिकारक की संख्या काफी कम है तो कीटनाशक का प्रयोग नहीं करना चाहिए। क्योंकि इससे खेत के लाभकारी कीट भी मर जाते हैं। इससे फायदे के बजाए नुकसान होने लगता है। खेतों में लाभकारी कीट मरने से फसल उत्पादन में 32 प्रतिशत में कमी आ जाती है। इसकी बीमारी रोकथाम के लिए जैविक नियंत्रण का प्रयोग करें। जैविक पदार्थों में नीम ऑयल, ट्राइको कार्ड आदि का प्रयोग करें।
लाभकारी कीट- मिडी ग्रास हॉपर, वर्ड विटल, पीडेरस, ओफिनिया, आफेंटलीस, कैराप्स, गोनियोजोस, मकड़ी, मधुमक्खी आदि फसलों को लाभ पहुंचाते हैं।
मधुमक्खी परंपरागन की क्रिया करके फसलों को लाभ पहुंचाती है।
हानिकारक कीट- गंदी कीट, भूरा, फुदका, हिस्पा, गाल मक्खी, पत्ती मेडरक, तना भेदक, सफेद बाली, सैनिक कीट, बालीदार सुंडी आदि है। जो फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं।