लॉकडाउन में सभी धार्मिक स्थल बंद हैं, जबकि बैंक्वेट हाल बंद होने के साथ शादियां भी टाली जा चुकी हैं। ऐसे में फूलों की खेती करने वाले किसानों पर आफत आन पड़ी है।
फूलों की तैयार फसल पर किसान ट्रैक्टर चलाकर नष्ट करने को मजबूर हैं। बुधवार को नूरनगर और लिसाड़ी गांव के किसानों ने फूलों की खड़ी फसल पर ट्रैक्टर चलाया। किसानों ने सरकार से बर्बाद फसल के मुआवजे की मांग की है।
नूरनगर निवासी किसान महिपाल सिंह और उनके भाई वीरपाल करीब 100 बीघा जमीन पर फूलों की खेती करते हैं। फूलों की बिक्री न होने की वजह से उन्हाेंने खेतों की जुताई करवा दी। बताया कि लॉकडाउन की वजह से मंदिर, शादी के मंडप व शादियां के मौके पर लॉकडाउन के कारण फूलों की मांग न होने से साज सज्जा का व्यापार बंद है। जिसकी वजह से फूलों की बिक्री नहीं हो पर रही है।
बिक्री के इंतजार में अधिकतर फूल भी खेत में ही खराब हो गए हैं और आगामी फसल की बुवाई में भी देरी हो रही है। इसी के चलतेकिसानों के सामने फूलों की खड़ी फसल को जोतने की मजबूरी हो गई है। जिला प्रशासन व सरकार से मांग है कि हमारा दुखदर्द जाने और मुआवजा तय करे।
नूरनगर निवासी किसान दयाराम और लिसाड़ी निवासी ललित ने फूलों की खेती की बर्बादी के बारे में बताया कि लाखों का नुकसान हो गया है। करीब 125 बीघा जमीन जोती है, जिसमें से हर तीसरे दिन लाखों की कीमत के फूल बाजार में पहुंचते थे। जबकि नूरनगर और लिसाड़ी गांव के किसानों की कई सौ बीघा जमीन पर फसल तैयार खड़ी है।