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Meerut News: मानसून की बेरुखी से किसान मायूस

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बहसूमा। किसान वीरेंद्र नागर
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- सूखने लगे खेत, फसल चौपट होने का बढ़ा खतरा
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संवाद न्यूज एजेंसी
बहसूमा। मानसून की दस्तक में हो रही देरी अब क्षेत्र के किसानों की चिंता बढ़ाने लगी है। बारिश नहीं होने से खेतों की नमी लगातार खत्म हो रही है और फसलों पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। किसानों का कहना है कि अगर जल्द बारिश नहीं हुई तो उन्हें एक बार फिर भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है।
मौसम वैज्ञानिकों ने सामान्य से बेहतर बारिश की संभावना जताई है। इससे किसानों ने अच्छी पैदावार की उम्मीद में तैयारियां भी पूरी कर ली थीं लेकिन जून के आखिर तक पर्याप्त बारिश नहीं होने से उनकी उम्मीदें टूटने लगी हैं। खेत सूख रहे हैं, चारे की बुवाई प्रभावित हो रही है और धान की नर्सरी तैयार करने में भी परेशानी आ रही है।किसानों का कहना है कि पहले से ही खेती की लागत और महंगाई लगातार बढ़ रही है। ऐसे में मानसून की देरी उनकी मुश्किलों को और बढ़ा रही है। किसानों ने सरकार और संबंधित विभागों से सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली और पानी उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि फसलों को बचाया जा सके।
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किसान गौरव चौधरी ने बताया कि भीषण गर्मी और बारिश की कमी से फसलें सूख रही हैं। बिजली आपूर्ति भी पर्याप्त नहीं मिल रही, जिससे सिंचाई प्रभावित हो रही है। खासकर गन्ने की फसल सूखने की कगार पर पहुंच गई है।

किसान वीरेंद्र नागर का कहना है कि धान की पौध तैयार करने के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। यदि जल्द बारिश नहीं हुई तो धान की रोपाई समय पर नहीं हो सकेगी, जिससे उत्पादन पर सीधा असर पड़ेगा।
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कोट..
इस बार गन्ने की अच्छी पैदावार होने की अच्छी उम्मीद दिख रही थी। लेकिन पर्याप्त बरसात होने की वजह से गन्ने बढ़वार भी प्रभावित हुई है। क्योंकि जून माह में तेजी से बढ़ती है। समय से बरसात न होने के कारण किसान को गन्ने की फसल में मिट्टी चढ़ाने में दिक्कत का सामना करना पड़ा। - मुकेश ठाकुर, कृषि विशेषज्ञ

बहसूमा। किसान वीरेंद्र नागर

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