फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Meerut News: किसानों ने बिजली काटी, पांच घंटे ठप रही औद्योगिक क्षेत्र और कई कॉलोनियों की बिजली

Thu, 01 Jan 2026 02:51 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
विज्ञापन
संदीप ,,, परतापुर ​​स्थित रिठानी बिजली घर में बिजली संब​धित समस्याओं को लेकर धरने पर बैठे किसान
विज्ञापन
मेरठ। बिजली समस्याओं का समाधान न होने पर तीन दिन से रिठानी विद्युत उपकेंद्र पर धरने पर बैठे किसानों का गुस्सा बुधवार को फूट पड़ा। नाराज किसानों ने बिजलीघर से औद्योगिक समेत तीन फीडरों की बिजली आपूर्ति काट दी। जिससे कई फैक्टरियों और कॉलोनियाें की बिजली ठप हो गई। इसके बाद विद्युत निगम के एक्सईएन ने बिजलीघर पहुंचकर किसानों को समझाया। उनकी डीएम से फोन पर बात कराई। डीएम के आश्वासन के बाद किसान माने और शाम करीब छह बजे बिजली आपूर्ति चालू कराई गई।
विज्ञापन

कंचनपुर घोपला निवासी किसान नेता विजयपाल घोपला रिठानी बिजली घर स्थित एसडीओ कार्यालय में तीन दिन से बिजली समस्याओं को लेकर धरने पर बैठे हैं। मंगलवार को कोई सुनवाई न होने से नाराज किसान नेता विजय पाल घोपला भूख हड़ताल पर बैठ गए थे। इसके बाद अधिशासी अभियंता डीवी सिंह बातचीत के लिए पहुंचे और किसानों से वार्ता की, लेकिन समाधान निकल सका। बुधवार को दर्जनों किसान बिजली घर पहुंचे और हंगामा करते हुए जबरन दोपहर करीब एक बजे औद्योगिक सहित तीन फीडरों की बिजली काट दी।
जिससे चंद्रो देवी द्वार, औद्योगिक क्षेत्र, संगम चौराहा, कुंडा रोड, पूठा रोड, रिठानी दिल्ली रोड ओर संजय वन चौराहा सहित कई कॉलोनियों की बिजली आपूर्ति ठप हो गई। कई औद्योगिक क्षेत्र की कई फैक्टरियों में काम बंद हो गया। उद्यमी बिजली घर पहुंचे और आपत्ति दर्ज कराई। उद्यमियों की शिकायत पर अधिशासी अभियंता बिजलीघर पहुंचे और किसानों की जिलाधिकारी से फोन पर बात कराई। जिलाधिकारी ने किसानों को लिखित में शिकायत दर्ज कराने पर समाधान करने का आश्वासन दिया। जिसके बाद पांच घंटे बाद शाम छह बजे बिजली आपूर्ति सुचारू की गई।
विज्ञापन

किसानों की प्रमुख समस्या
किसान नेता विजयपाल घोपला आदि के अनुसार विद्युत निगम ग्रामीणों के स्मार्ट मीटर के लोड बढ़ा दिए गए। किसानों से पूछा तक नहीं जा रहा। कई किसानों के स्मार्ट मीटर के बिल भी नहीं आ रहे। कुछ किसानों के कई महीनों के बिल एक साथ भेज दिए गए। रकम अधिक होने से वह भर नहीं पा रहे। खेतों में घुसकर पशु किसानों की फसलों को खराब कर रहे है जिस कारण किसानों को आर्थिक नुकसान हो रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें