चंदक-बिजनौर। विदुर की धरती बिजनौर के ग्राम पुंडरीकला के खेतों में स्ट्रॉबेरी की खेती हो रही है। जिले का वातावरण पौधे के अनुकूल होने से फल का उत्पादन भी अच्छा हो रहा है। एक पौधा एक बार में 2 से 3 किलो फल दे रहा है। स्ट्रॉबेरी का अच्छा उत्पादन होने से किसान विपुल कुमार की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है। अन्य किसान भी इस खेती से प्रभावित हो रहे हैं।
बिजनौर जनपद गन्ना बाउल क्षेत्र है। परंतु यहां गन्ने के साथ औद्योनिक खेती का ग्राफ भी बढ़ रहा है। इसी क्रम में चंदक क्षेत्र के ग्राम पुंडरीकला निवासी विपुल कुमार पिछले साल से स्ट्रॉबेरी की खेती कर रहे हैं। विपुल ने बताया कि उन्होंने ट्रायल के तौर पर एक बीघा में स्ट्रॉबेरी की खेती की थी। अच्छा उत्पादन व अच्छा दाम मिलने पर उन्होंने इसका क्षेत्रफल चार बीघा कर दिया। उन्होंने खेती के पास सजावट व लकड़ी का गेट व बैठने आदि की व्यवस्था भी की है। वर्तमान में चार बीघे में लगभग 800 पौधे है।
एक बीघा में लगभग 2000 पौध है
किसान विपुल कुमार ने बताया कि एक बीघा जमीन में करीब 2000 पौधे लगते हैं। एक पौधा एक बार में 2 से 3 किलो फल देता है l करीब चार माह की खेती होती है। अक्टूबर माह के लास्ट में फसल आ जाता है।
150 रुपये प्रति किलो में जाती है बिक
किसान ने बताया कि सीजन में स्ट्रॉबेरी की मांग ज्यादा होती है। वैसे भी यह फसल लोकल व आसपास के राज्य और एनसीआर क्षेत्र के बाजार में 1 किलो स्ट्रॉबेरी की कीमत लगभग 150 रुपये प्रति किलो मिल जाती है।
जिले के किसान करने लगे औद्योनिक खेती
जिला उद्यान अधिकारी आरएन वर्मा ने बताया कि जनपद में किसान गन्ने के साथ औद्योनिक खेती कराने लगे हैं। जिले में ड्रेगन फ्रूट, स्ट्रॉबेरी, लीची आदि का उत्पादन हो रहा है। विभाग की ओर से किसानों को औद्योनिक खेती करने के लिए जागरूक किया जा रहा है। कम समय की फसलों की खेती से किसानों को आर्थिक लाभ भी ज्यादा है।