बिजनौर। यूं तो सरकार से बजट मिलता है मगर निकायों की तर्ज पर अब ग्राम पंचायत भी आमदनी की राह पर बढ़ चुकी हैं। दरअसल ग्राम सभाओं ने कूड़े के ढेर में ही पैसा ढूंढ लिया है। जी हां, जिले की 70 से अधिक पंचायत कूड़ा कलेक्शन और कूड़े में मिलने वाले सामान को बेचकर ही आमदनी कर रही हैं।
स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण का जिले में फेज टू चल रहा है। पहले फेज में घर घर शौचालयों का निर्माण कराया गया था। अब दूसरे फेज में कूड़ा निस्तारण पर जोर दिया जा रहा है। यह योजना तो जिले की अधिकांश पंचायतों तक पहुंची मगर असल में अमल कुछ ही पंचायतों में हुआ।
खासकर 70 पंचायतों ने इस योजना में आमदनी का जरिया भी ढूंढ लिया। डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन में एक तरफ गांव में साफ सफाई हो रही है, वहीं दूसरी ओर पंचायत आमदनी भी करने लगी हैं।
ये पंचायत रहीं आमदनी में अव्वल
ग्राम पंचायत जालबपुर गुदड़ आमदनी करने के मामले में सिरमौर बनी है। इस पंचायत ने इस साल करीब डेढ़ लाख रुपये की आय की है जबकि पिछले साल यह आंकड़ा सवा लाख रुपये था। इसके अलावा सीरवासुचंद पंचायत में एक लाख पचपन हजार और रेहड़ ने करीब पचपन हजार रुपये कमाए हैं। कासमपुर गढ़ी में 27 हजार, उमरी कलां में 56 हजार एवं पीपला जागीर ने 35 हजार की आय प्राप्त की।
कूड़े से बनाया वर्मी कम्पोस्ट
जालबपुर गुदड़ ग्राम पंचायत की ग्राम प्रधान नंदिनी राजपूत ने बताया कि उनकी पंचायत में स्वयं सहायता समूहों जुड़ी महिलाएं कूड़ा कलेक्शन होने के बाद वर्मी कम्पोस्ट बनाने के काम में लगी हैं। कचरे से वर्मी कम्पोस्ट बनाकर बेचा जाता है। वहीं कूड़े के ढेर में मिलने वाले प्लास्टिक अन्य धातु वाले सामान आदि बेचकर भी कमाई की जा रही है।
जिले की करीब 70 ग्राम पंचायतों में डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन और कूड़ा निस्तारण के जरिए आय प्राप्त की जा रही है। इस साल करीब आठ लाख रुपये की आय पंचायतों ने प्राप्त की है। - दमनप्रीत कौर, डीपीआरओ